विदेश मंत्रालय ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें कहा गया है कि पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं है. इस बयान के साथ मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवाओं से जुड़े कई आंकड़े भी पेश किए. इस बयान पर मशहूर वकील-राजनीतिज्ञ कपिल सिब्बल और मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि साल 2025 में सरकार ने 1.5 करोड़ पासपोर्ट और इससे जुड़ी सेवाएं लोगों को दी हैं. इनमें से सिर्फ पासपोर्ट की संख्या 1.39 करोड़ रही.
अधिकारी के मुताबिक पुलिस वेरिफिकेशन को छोड़कर पासपोर्ट बनने में सिर्फ छह कामकाजी दिन लगते हैं. पासपोर्ट सेवा केंद्र और पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र पर लोगों को 45 मिनट से भी कम समय देना पड़ता है.
देश भर में अभी 545 पासपोर्ट सेवा केंद्र हैं, जबकि दस साल पहले यह संख्या सिर्फ 77 थी. यानी इन केंद्रों की संख्या में छह गुना बढ़ोतरी हुई है. पिछले साल 10 नए पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले गए थे और इस साल भी 10 और केंद्र खोले जाएंगे.
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किसने क्या कहा?
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है, तो फिर कौन सा दस्तावेज नागरिकता साबित करेगा. उन्होंने कहा कि इसी आधार पर बूथ लेवल अधिकारी किसी की नागरिकता पर शक कर सकते हैं और उसका वोट देने का अधिकार छीन सकते हैं. सिब्बल ने इसे चुनाव में बीजेपी की जीत से जोड़ते हुए कहा कि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में जाना चाहिए.
मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने भी इस बयान पर हैरानी जताई. उनका कहना है कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है, तो क्या सरकार बिना पूरी तरह यकीन किए कि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक है, उसे यह दस्तावेज दे रही है. उन्होंने इस पूरी बात को बेतुका बताया है.
अब भारतीयों के लिए खुला ये नया रास्ता
अधिकारी ने यह भी बताया कि भारतीयों को बिना वीजा के यात्रा करने की सुविधा अब 27 देशों में है, जबकि साल 2019 में यह संख्या सिर्फ 16 थी. इसके अलावा 47 देश भारतीयों को आने पर वीजा देते हैं और 66 देशों में इलेक्ट्रॉनिक वीजा की सुविधा है. भारत ने ज्यादातर यूरोपीय देशों के साथ मोबिलिटी समझौते किए हैं, जिससे छात्रों, शिक्षकों, कामगारों, पर्यटकों और व्यापारियों को आसानी से आने जाने में मदद मिलती है. साथ ही इन समझौतों से गैरकानूनी तरीके से रह रहे प्रवासियों को वापस भेजने का रास्ता भी आसान बनता है.
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