टाटा को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की एक्स पोस्ट पर निर्मला सीतारमण ने कड़ा जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि हर मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और व्यावसायिक या कानूनी मामलों को यूं ही आपराधिक बताना स्वीकार नहीं है. उन्होंने लाइसेंस कोटा राज की याद दिलाई और अदालतों का अपमान करने का इतिहास भी गिनाया.
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि टाटा को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और कोई भी कारोबारी नेता एक शब्द बोलने की हिम्मत नहीं करता. उन्होंने पूछा कि कारोबारी कब तक चुप रहेंगे, क्या तब तक, जब तक वे आप पर मालिकाना हक न जमा लें. उन्होंने कहा कि भारतीय कारोबार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का खिलौना नहीं है. उनके मुताबिक आपमें हिम्मत की कमी है, हमारे पास है, और इन अपराधों के लिए न्याय सुनिश्चित किया जाएगा.
इसके जवाब में सीतारमण ने राहुल को नेता प्रतिपक्ष होने की याद दिलाते हुए हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने से बचने की सलाह दी. उन्होंने पूछा कि क्या राहुल कारोबारी नेताओं को भड़काकर अविश्वास और जहर फैलाने में अपने साथ जोड़ना चाहते हैं.
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सीतारमण ने आरोप लगाया कि राहुल भारतीय उद्योग और उद्यमियों की सफलताओं की बार बार आलोचना करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि दशकों तक राहुल की पार्टी ने लाइसेंस कोटा राज के जरिए उद्यमियों की भावना को दबाए रखा और करोड़ों भारतीयों को गरीबी में धकेला. इसके उलट, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार उद्योग को रोजगार देने वाला और आर्थिक विकास का इंजन मानती है. सरकार की नीतियां कारोबार को बढ़ावा देने, उद्योग की मदद करने और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई हैं.
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों, नेताओं, सरकारों और संस्थाओं की बराबर जिम्मेदारी है कि वे उद्योग का साथ दें, किसानों को मजबूत करें और युवाओं का भविष्य सुरक्षित बनाएं. इसलिए बेबुनियाद आरोप लगाने की जगह रचनात्मक बातचीत जरूरी है. उनके मुताबिक संविधान सभी नागरिकों को न्याय का भरोसा देता है और अदालतों पर उसे बनाए रखने की जिम्मेदारी है. सीतारमण ने कहा कि इतिहास गवाह है कि राहुल, उनकी पार्टी और उसके प्रधानमंत्रियों ने न्यायपालिका का अपमान किया. अंत में उन्होंने राहुल से कहा कि हर जगह भूत देखना बंद करें.
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