'टोल लेने के बावजूद खराब सड़क देना गलत...', NHAI को फटकार, कार मालिक को मिलेगा मुआवजा

नागपुर उपभोक्ता आयोग ने सड़कों की खराब हालत को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि टोल वसूली के बावजूद सुरक्षित और अच्छी सड़क उपलब्ध न कराना 'सेवा में कमी' है. आयोग ने गड्ढे की वजह से वाहन क्षतिग्रस्त होने पर NHAI को मोटर चालक को मुआवजा देने का आदेश दिया.

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उपभोक्ता आयोग ने टोल लेकर खराब सड़क देने को सेवा में कमी बताया और NHAI को गाड़ी मालिक को मुआवजा देने का आदेश दिया. (Photo: AI/Gemini) उपभोक्ता आयोग ने टोल लेकर खराब सड़क देने को सेवा में कमी बताया और NHAI को गाड़ी मालिक को मुआवजा देने का आदेश दिया. (Photo: AI/Gemini)

aajtak.in

  • नागपुर ,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:31 PM IST

महाराष्ट्र के नागपुर स्थित उपभोक्ता आयोग (कंज्यूमर कमीशन) ने एक अहम फैसले में कहा है कि टोल वसूली के बावजूद खराब सड़क उपलब्ध कराना 'सेवा में कमी' (Deficiency in Service) माना जाएगा. आयोग ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सड़क पर गड्ढों की वजह से गाड़ी को नुकसान होने के चलते एक मोटर चालक को मुआवजा देने का निर्देश दिया है.

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नागपुर के उपभोक्ता आयोग ने इस महीने की शुरुआत में दिए अपने आदेश में कहा, 'टोल लेकर सुरक्षित और चलने योग्य सड़क उपलब्ध कराना टोल वसूलने वाली कंपनी या प्राधिकरण की जिम्मेदारी है. टोल वसूलकर खराब सड़क उपलब्ध कराना सेवा में कमी है.' आयोग ने NHAI की छिंदवाड़ा प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट को शिकायतकर्ता को उसकी गाड़ी की मरम्मत और टोल रिफंड के रूप में 1,030 रुपये देने का आदेश दिया.

इसके अलावा उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता को पहुंची मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए 10,000 रुपये, मुकदमेबाजी में हुए खर्च की भरपाई के लिए 5,000 रुपये देने को भी कहा. शिकायतकर्ता के मुताबिक, वह 2 अक्टूबर 2020 को नागपुर से मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जा रहा था और उसने निर्धारित टोल शुल्क भी चुकाया था. यात्रा के दौरान उसकी कार एक गहरे और तेज गड्ढे से टकरा गई, जिससे गाड़ी का स्टील व्हील रिम बुरी तरह मुड़ गया और टायर निकल गया.

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शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे स्पेयर टायर के सहारे यात्रा पूरी करनी पड़ी और कार की मरम्मत कराने के लिए एक अतिरिक्त दिन रुकना पड़ा. उसने यह भी आरोप लगाया कि वापसी के दौरान टोल प्लाजा कर्मचारियों ने शिकायत पुस्तिका देने से इनकार कर दिया और कहा कि संबंधित अधिकारी मौजूद नहीं हैं. शिकायतकर्ता ने पहले राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को नोटिस भेजकर केवल वाहन मरम्मत में हुए खर्च की भरपाई मांगी थी, लेकिन उसका आरोप था कि लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज करने की आदत के चलते अधिकारियों ने उस पर भी ध्यान नहीं दिया.

इसके बाद उसने उपभोक्ता आयोग का रुख किया और NHAI पर सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग की. अपने जवाब में NHAI की छिंदवाड़ा यूनिट ने सड़क पर गड्ढे होने की बात स्वीकार की, लेकिन इसका कारण भारी बारिश और यातायात का दबाव बताया. प्राधिकरण ने कहा कि उस समय मरम्मत कार्य जारी था. हालांकि NHAI ने यह भी दलील दी कि शिकायतकर्ता ने वाहन के नियमित रखरखाव का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया, इसलिए मामला खारिज किया जाए.

उपभोक्ता आयोग ने NHAI की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन लॉ के तहत किसी उपभोक्ता के लिए वाहन के नियमित रखरखाव का रिकॉर्ड दिखाना कानूनी रूप से जरूरी नहीं है. यदि यह साबित हो जाए कि गड्ढों के कारण वाहन को नुकसान पहुंचा, तो वही पर्याप्त है. आयोग ने इस सड़क की जिम्मेदारी पूरी तरह NHAI की छिंदवाड़ा प्रोजेक्ट यूनिट पर तय की और NHAI व उसके नागपुर कार्यालय के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी.

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उपभोक्ता आयोग ने कहा, 'टोल वसूली और सड़क रखरखाव की मुख्य जिम्मेदारी NHAI छिंदवाड़ा यूनिट की है, इसलिए मुआवजे की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर तय की जाती है. टोल लेकर सुरक्षित और अच्छी सड़क उपलब्ध कराना संबंधित प्राधिकरण की जिम्मेदारी है. यदि सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहन क्षतिग्रस्त होता है, तो यह सेवा में कमी मानी जाएगी.' आयोग ने NHAI को 45 दिनों के भीतर मुआवजे की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है.

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