आईआरसीटीसी होटल आवंटन घोटाले से जुड़े लारा प्रोजेक्ट्स मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर PMLA के तहत आरोप तय कर दिए गए हैं.
अदालत ने कहा है इस बात का पक्का संदेह है कि परिवार के सदस्यों के नाम पर 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' यानी अपराध से हुई कमाई जनरेट की गई.
इस मामले में कुल 9 आरोपियों पर मनी लॉन्ड्रिंग के चार्ज फ्रेम किए जाने का निर्देश दिया गया है, जबकि 7 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया गया है.
मुकदमे का सामना करने वाले नौ आरोपियों में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटा तेजस्वी यादव, लालू के करीबी प्रेम चंद गुप्ता, उसकी पत्नी सरला गुप्ता, सुजाता होटल के डायरेक्टर विनय कोचर और विजय कोचर, लारा प्रोजेक्ट्स और सुजाता होटल्स हैं.
बरी होने वालों में लालू के दामाद राहुल यादव, गौरव गुप्ता, नथ मल कानकारनिया, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, राजीव रेलन और अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड हैं.
यह पूरा मामला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे. आरोप है कि उन्होंने रेलवे के रांची और पुरी स्थित बीएनआर (BNR) होटलों के रखरखाव का ठेका नियम ताक पर रखकर निजी कंपनी 'सुजाता होटल्स' को दिया था. इसके बदले में पटना में करोड़ों रुपये की कीमती जमीन को बेहद कम दामों में लालू परिवार से जुड़ी कंपनी (लारा प्रोजेक्ट्स) के नाम ट्रांसफर कराया गया था. सीबीआई (CBI) के केस के बाद ईडी (ED) ने इसमें मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था.
जिन आरोपियों पर आरोप तय किए गए हैं, उन्हें औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 3 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया गया है. दिल्ली कोर्ट का कहना है कि पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद द्वारा पद के दुरुपयोग का पक्का संदेह है.
आईआरसीटीसी होटल आवंटन घोटाले से जुड़े लारा प्रोजेक्ट्स मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर PMLA के तहत आरोप तय कर दिए गए हैं.
आरोपपत्र के मुताबिक CBI का आरोप है कि सन 2004 से 2009 के बीच जब लालू रेल मंत्री थे उस दौरान रांची और पुरी के IRCTC होटल का ठेका देने में भारी गड़बड़ी की गई.
CBI के मुताबिक ठेके के बदले लालू यादव के परिवार से जुड़ी कंपनी को करोड़ों की जमीन बेहद कम कीमत पर ट्रांसफर की गई.
सृष्टि ओझा / संजय शर्मा