झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) समेत कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के बाद रांची में प्रोटेस्ट बनाम प्रोटेस्ट की स्थिति बन गई है. जयपाल सिंह स्टेडियम में अनशन कर रहे आंदोलनकारी छात्रों की मांगें मानते हुए मुख्यमंत्री ने परीक्षाएं रद्द करने का ऐलान किया, जिसके बाद उनका अनशन समाप्त हो गया. हालांकि, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपना प्रदर्शन खत्म करने से इनकार कर दिया है तो वहीं दूसरी ओर पहले से नियुक्त होकर पदों पर कार्यरत सीजीएल अभ्यर्थी सोमवार रात से प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरने पर बैठ गए हैं. वह सरकार से फैसले पर स्पष्टता और न्याय की मांग करते हुए सड़क पर ही भूख हड़ताल करने की चेतावनी दे रहे हैं.
प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरने पर बैठे जेएसएससी-सीजीएल अभ्यर्थियों का कहना है कि वह सोमवार रात से ही यहां डटे हुए हैं. अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से सीधे अपील करते हुए सवाल किया कि उनकी क्या गलती थी, जिसके कारण एक ही रात में उनकी नौकरी छीन ली गई. अभ्यर्थियों ने कहा कि उनकी नियुक्ति अदालत के आदेश के तहत हुई थी और अब वह बेघर जैसी स्थिति में पहुंच गए हैं. उन्होंने ऐलान किया कि वो सड़क पर ही भूख हड़ताल शुरू करेंगे.
हमारा पक्ष बिना सुने लिया फैसला
प्रदर्शन में शामिल चंदा कुमारी ने कहा कि लोकतंत्र और न्यायपालिका का नियम है कि 100 दोषी छूट जाएं, लेकिन किसी एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना उनका पक्ष सुने हजारों निर्दोषों को तत्काल सजा सुना दी है. चंदा ने कहा कि सरकार ने पिछले 24 दिनों से सिर्फ एक पक्ष की बात सुनी और दूसरे पक्ष को अपनी बात रखने का कोई मौका नहीं दिया.
अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी नियुक्ति कोर्ट के आदेश पर हुई थी, जिसमें ये भी तय था कि भविष्य में जो लोग संलिप्त पाए जाएंगे सिर्फ उनकी नियुक्ति रद्द होगी और सही अभ्यर्थियों की सेवा जारी रहेगी. चंदा कुमारी ने बताया कि उन्होंने केवल यही एक परीक्षा पास नहीं की है, बल्कि उनका जेपीएससी पीटी और 14वीं जेपीएससी तथा एफआरओ मेन्स भी निकला हुआ है. उन्होंने कहा कि बाकी सभी साथियों के आने के बाद सर्वसम्मति से आगे का निर्णय लिया जाएगा.
कोर्ट ने स्वीकार नहीं की इनकी याचिका
अभ्यर्थी सत्याकी कुमार सिंह ने कहा कि आंदोलनकारी सुप्रीम कोर्ट गए थे, लेकिन 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार तक नहीं की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि मामला जेपीएससी का था, लेकिन सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल को ही रद्द कर दिया.
उन्होंने कहा कि जब मामला न्यायालय में था और 6 महीने की रिपोर्ट मांगी गई थी तो बिना दूसरा पक्ष सुने परीक्षा रद्द करना पूरी तरह तर्कहीन है.
सत्याकी कुमार सिंह ने आगे कहा कि सरकार ने एक गलत ट्रेंड सेट कर दिया है कि भीड़ जुटाकर आंदोलन करो और कोई भी परीक्षा रद्द करवा लो.उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द करने का सही तरीका ये है कि कोर्ट में निष्पक्ष जांच कराई जाए. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि भारी बहुमत वाली सरकार होने के बावजूद वह इस तरह भीड़तंत्र के दबाव में आकर फैसले क्यों ले रही है.
6.50 लाख से ज्यादा प्रतिभागी प्रभावित
झारखंड सरकार के इस बड़े फैसले से 6.50 लाख से अधिक प्रतिभागी सीधे प्रभावित हुए हैं. सरकार ने 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2023, संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2025, झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) और वन क्षेत्र पदाधिकारी भर्ती समेत वर्ष 2014 से अब तक आयोजित कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. इसके चलते राज्य में भर्ती परीक्षाओं को लेकर असमंजस और तनाव बढ़ गया है.
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