'चीन के साथ रिश्तों को सीमा विवाद का बंधक...' बोले पूर्व CDS चौहान, पाकिस्तान को लेकर भी चेताया

पाकिस्तान को लेकर पूर्व सीडीएस अनिल चौहान ने कहा कि भारत के लिए यह मुल्क आने वाले समय में भी बड़ी सुरक्षा चिंता और खतरा बना रहेगा.

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पड़ोसी मुल्कों के साथ रिश्तों पर पूर्व सीडीएस अनिल चौहान का बड़ा बयान (Photo: ITG) पड़ोसी मुल्कों के साथ रिश्तों पर पूर्व सीडीएस अनिल चौहान का बड़ा बयान (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:45 AM IST

चीन, पाकिस्तान और 'इस्लामिक नाटो' को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि चीन के साथ सीमा विवाद अभी भी अनसुलझा है. इसके बावजूद नई दिल्ली और बीजिंग के संबंधों को केवल सीमा विवादों का बंधक नहीं बनाया जा सकता.

राजधानी दिल्ली में शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में ‘भारत की सुरक्षा के लिए खतरे और चुनौतियां’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के लिए सतर्कता, विश्वसनीय क्षमताएं, स्पष्ट समझौते और उनका लगातार पालन जरूरी है.

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उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कुछ दिन पहले बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत की थी. वार्ता में बॉर्डर के सीमांकन और सीमा-पार सहयोग को जारी रखने के प्रयासों पर मुख्य रूप से चर्चा हुई थी.

पाकिस्तान को लेकर पूर्व सीडीएस ने कहा कि भारत के लिए यह मुल्क आने वाले समय में भी बड़ी सुरक्षा चिंता और खतरा बना रहेगा, ऐसा मेरा मानना है. पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये द्वारा एक महत्वपूर्ण संयुक्त रक्षा समझौते, जिसे इस्लामिक नाटो कहा जा रहा है, इस पर उन्होंने कहा कि ऐसे समझौते पाकिस्तान में अति-आत्मविश्वास पैदा कर सकते हैं. इससे इस्लामाबाद एक और गलत आकलन कर सकता है.

जनरल चौहान (सेवानिवृत्त) ने भारत के सामने मौजूद कई चुनौतियों और उनसे निपटने के तरीकों पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा, जहां तक हमारे उत्तरी पड़ोसी का सवाल है, वह बिल्कुल अलग दीर्घकालिक और व्यापक चुनौती पेश करता है.

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चीन के साथ सीमा विवाद अभी भी अनसुलझा है. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की भी कोई पारस्परिक रूप से सहमत परिभाषा नहीं है. धारणाओं में अंतर, बुनियादी ढांचे के विकास और अग्रिम सैन्य तैनाती के कारण स्थिति बिगड़ने की आशंका बनी रहती है.

चीन और भारत को दो प्रमुख एशियाई शक्तियां और बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बताते हुए चौहान ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को केवल सीमा विवादों का बंधक नहीं बनाया जा सकता. दोनों देश सहयोग भी करते हैं और प्रतिस्पर्धा भी. दोनों क्षेत्रीय और वैश्विक व्यवस्था को लेकर विचार अलग-अलग हैं. इसलिए चीन के साथ बातचीत और संपर्क बनाए रखना आवश्यक है.

उन्होंने कहा, हम यही काम SCO के तहत और अब BRICS के तहत कर रहे हैं. एशिया का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत और चीन एक दूसरे को किस तरह संभालते हैं.

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