गुजरात: 15 दिन बाद कोमा से बाहर आए CM के बेटे, PM मोदी ने भी की थी ठीक होने की प्रार्थना

गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल के बेटे को 15 दिन पहले ब्रेन स्ट्रोक आया था. आनन-फानन में उन्हें अहमदाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में डॉक्टर की रिकमेंडेशन पर उन्हें मुंबई के हिन्दुजा अस्पताल रेफर कर दिया गया था. अब अनुज कोमा से बाहर आ गए हैं.

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अनुज पटेल/भूपेंद्र पटेल (फाइल फोटो) अनुज पटेल/भूपेंद्र पटेल (फाइल फोटो)

गोपी घांघर

  • अहमदाबाद,
  • 16 मई 2023,
  • अपडेटेड 1:45 PM IST

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के इकलौते बेटे अनुज पटेल को 15 दिन तक कोमा में रहने के बाद होश आ गया है. मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में भर्ती अनुज की तबीयत में सुधार देखने को मिल रहा है. अस्पताल ने अनुज का मेडिकल बुलेटिन भी जारी किया है. बुलेटिन के मुताबिक अनुज पटेल कोमा से बाहर आ गए हैं. वेंटिलेटर सिस्टम को भी फिलहाल हटा दिया गया है. हालांकि, उन्हें अभी ICU में ऑब्जर्वेशन पर रखा गया है.

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बता दें कि सीएम के 38 साल के बेटे अनुज पटेल को 30 अप्रैल को ब्रेन स्ट्रोक आया था. इसके बाद उन्हें फौरन अस्पताल में शिफ्ट किया गया था. यहां उनका ऑपरेशन किया गया. हालांकि, तबियत में सुधार ना होने के कारण उन्हें एयर एम्बुलेंस के जरिए मुबई के हिन्दुजा अस्पताल ले जाया गया था. यहां पिछले 15 दिनों से अनुज कोमा में थे. उन्हे वेंटिलेटर पर रखा गया था. 

डॉक्टर ने दी थी मुंबई ले जाने की सलाह

अनुज की तबियत में सुधार के बाद मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने राहत की सांस ली है. बता दें कि खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर अनुज की तबियत में जल्द सुधार होने के लिए प्रार्थना की थी. दरअसल, हिंदुजा अस्पताल के डॉ. मिश्रा ने अहमदाबाद में भर्ती अनुज का मेडिकल चेकअप कराया था, इसके बाद उन्हें मुंबई में भर्ती करवाने की सलाह दी थी.

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अस्पताल देखने पहुंचे थे कई नेता

ब्रेन स्ट्रोक आने के फौरन बाद भूपेंद्र पटेल के बेटे अनुज को दोपहर 2:45 बजे अहमदाबाद के केडी अस्पताल में ले जाया गया था. हॉस्पिटल की तरफ से जारी बुलेटिन में कहा गया था कि ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित होने के बाद उनका ऑपरेशन किया गया. अहमदाबाद में अनुज के भर्ती होने होने पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल, राज्यपाल आचार्य देवव्रत और परिमल नथवानी अनुज का हालचाल जानने अस्पताल पहुंचे थे. 

(नोट: इस खबर के नीचे गलती से कोमा में गए एक दूसरे मरीज की कहानी का हिस्सा जोड़ दिया गया था, जो किसी भी तरह से प्रासंगिक नहीं था. डेस्क पर हुई इस संपादकीय त्रुटि के लिए खेद है.)

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