स्पीड से थोड़ा ब्रेक, Gen Z के बीच क्यों बढ़ रहा है Slow Living का ट्रेंड?

Gen-Z की तेज रफ्तार जिंदगी के बीच Slow Living एक ऐसे ट्रेंड के तौर पर बढ़ रहा है, जो लगातार काम और स्क्रीन टाइम से थोड़ा Pause लेने पर जोर देता है. इसमें बड़े गोल्स के बजाय डेली लाइफ के छोटे मुमेंट्स, हॉबीज और सेटिस्फैक्शन देने वाली Activities को इम्पॉर्टेंस दिया जाता है. लेकिन क्या सोशल मीडिया ने इसे एक Aesthetic Trend भी बना दिया है?

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क्या स्लो लिविंग का टेंड जेन जी के लिए नया एस्थेटिक क्या स्लो लिविंग का टेंड जेन जी के लिए नया एस्थेटिक

सारा सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 19 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:13 AM IST

सुबह उठते ही फोन चेक करना, लगातार नोटिफिकेशन्स देखना, काम की डेडलाइन्स पूरी करना, Social Media पर एक्टिव रहना और हर वक्त कुछ नया हासिल करने का प्रेशर-Gen Z की लाइफ में Speed लगभग हर जगह है, लेकिन इसी फास्ट-पेस्ड Lifestyle के बीच एक नया Trend दिखाई दे रहा है-Slow Living. यानी लाइफ का थोड़ा धीरे जीना, हर चीज को तुरंत पाने की कोशिश न करना और डेली लाइफ के छोटे-छोटे मुमेंट्स का इन्जॉय करना.

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Fast Life से एक छोटा-सा Break

Gen Z ने Technology के साथ बड़ा होते हुए कन्वीनीयंस तो पाया है, लेकिन इसके साथ कॉन्सटेंट कनेक्टिविटी भी आई है. काम खत्म होने के बाद भी Emails, Messages और Social Media एक्टिव रहते हैं. रेस्ट करने के लिए फोन खोलना भी कई बार Scrolling में बदल जाता है.

ऐसे में Slow Living एक तरह का Mental Pause बनकर सामने आ रहा है. सुबह की Coffee बिना फोन के पीना, खाना खुद बनाना, शाम को Walk पर जाना या कुछ देर सिर्फ Music सुनना-ये छोटे काम अब सिर्फ Routine नहीं, बल्कि जेन जी की लाइफ में एक तरह की लाइफ स्टाइल चॉइस बन रहे हैं.

स्लो लाइफ क्यों रोमांटिसाइज कर रहे है जेन जी?

 

 

प्रोडक्टिविटी से ज्यादा प्रेजेन्स 

Gen Z के बीच Slow Living की पॉपुलैरिटी को उस प्रोडक्टिविटी कल्चर से भी कनेक्ट कर के देखा जा सकता है, जिसमें हर टाइम खुद को प्रोडक्टिव बनाए रखने का एक अनवांटेड प्रेशर रहता है. कुछ सीखना है, करियर बनाना है, Side Hustle करना है, Fitness पर काम करना है और साथ ही सोशल लाइफ भी मेनटेन करनी है.

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Slow Living इस माइंड सेट से थोड़ा अलग रास्ता दिखाता है. इसमें हर खाली टाइम को किसी काम से भरना जरूरी नहीं है. कभी-कभी बिना किसी रीजन के बैठना भी ठीक है.

'Little Things' में खुशी

Slow Living का एक बड़ा पार्ट डेली लाइफ की छोटी चीजों को अप्रिशिएट करना है. घर पर कुकिंग करना, बुक्स पढ़ना, गार्डनिंग, Journaling करना, Baking करना या बस विंडो के पास बैठकर बारिश देखना-इन Activities में कोई बड़ा Achievement नहीं है. फिर भी शायद इन्हीं मुमेंट्स में Gen Z को वह Comfort मिल रहा है, जो लगातार Online रहने और आगे बढ़ने की दौड़ में आसानी से नहीं मिलता.

क्या Slow Living सच में Slow है?

इंटरेस्टिंग बात ये है कि Slow Living को भी सोशल मीडिया ने एक Aesthetic Trend बना दिया है. Pinterest और Instagram पर कोजी होम्स, मॉर्निंग रुटीन्स,होममेड फूड, Candles और Nature Walks वाला परफेक्ट Slow-Life कॉन्टेंट बहुत ज्यादा क्रिएट किया जाने लगा है. 

इसलिए Gen Z जिस Slow Living को Romanticise कर रहा है, वह हमेशा पूरी तरह Slow या Perfect नहीं होता. रियल लाइफ में Deadlines और Responsibilities बनी रहती हैं.

शायद Slow Living का मतलब जिंदगी को पूरी तरह रोक देना नहीं, बल्कि उसकी Speed को कभी-कभी अपने अकॉर्डिंग फिक्स करना है. क्योंकि जब दुनिया हर वक्त 'Hurry Up' कह रही हो, तब थोड़ा रुकना भी अपने आप में एक Luxury लग सकता है.
 

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