विनायक चतुर्थी का दिन, 3000 किमी का सफर और मीनाक्षी मंदिर पहुंची हथिनी ‘दुर्गा’, ऐसे हुआ स्वागत

विनायक चतुर्थी के मौके पर पांच साल की हथिनी दुर्गा को मदुरई के मीनाक्षी अम्मन मंदिर लाया गया. दुर्गा ने असम से मदुरई तक करीब 3000 किलोमीटर का सफर तय किया. मंदिर पहुंचने पर कर्मचारियों और श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर उसका स्वागत किया. मंदिर में पहले से पार्वती नाम की हथिनी है. दुर्गा मंदिर में नई सदस्य के रूप में शामिल हुई है.

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दिर पहुंची पांच साल की हथिनी दुर्गा. (Photo: Screengrab) दिर पहुंची पांच साल की हथिनी दुर्गा. (Photo: Screengrab)

प्रमोद माधव

  • मदुरई,
  • 15 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:26 PM IST

विनायक चतुर्थी के खास मौके पर मदुरई के प्रसिद्ध मीनाक्षी अम्मन मंदिर में एक नई मेहमान की एंट्री हुई. पांच साल की मादा हथिनी दुर्गा को मंगलवार को मंदिर परिसर में लाया गया. असम से मदुरई तक करीब 3000 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद जब दुर्गा मंदिर पहुंची तो मंदिर के कर्मचारियों और श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर उसका स्वागत किया.दुर्गा के मंदिर पहुंचने के साथ ही वह मीनाक्षी अम्मन मंदिर की नई हथिनी बन गई है. मंदिर में पहले से पार्वती नाम की एक मादा हथिनी मौजूद है. अब दुर्गा के आने से मंदिर में दो हथिनियां हो गई हैं.

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दुर्गा को असम से मदुरई लाया गया है. मंदिर पहुंचने से पहले उसने करीब 3000 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया. मंगलवार को जब दुर्गा मंदिर परिसर में पहुंची तो वहां मौजूद मंदिर कर्मचारियों और श्रद्धालुओं ने उसका स्वागत किया. विनायक चतुर्थी के दिन दुर्गा का मंदिर पहुंचना इस पूरे घटनाक्रम का खास हिस्सा रहा. मंदिर परिसर में पहुंचते ही श्रद्धालुओं और कर्मचारियों ने दुर्गा पर फूल बरसाए और उसका स्वागत किया.

हाईकोर्ट के आदेश के बाद मिली अनुमति

दुर्गा को मंदिर में लाने का रास्ता हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट की एक पीठ के आदेश के बाद साफ हुआ. कोर्ट की पीठ ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें मंदिरों को हाथी खरीदने या दान में हाथी लेने से रोक दिया गया था. इसके बाद वन विभाग ने असम से दुर्गा को मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर लाने की अनुमति दी. अनुमति मिलने के बाद दुर्गा को असम से मदुरै लाया गया.

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मंदिर में पहले से है पार्वती नाम की हथिनी

मीनाक्षी अम्मन मंदिर में पहले से पार्वती नाम की एक मादा हथिनी है. अब पांच साल की दुर्गा भी मंदिर का हिस्सा बन गई है. इस तरह मंदिर में दो मादा हथिनियां हो गई हैं. दुर्गा के आने से कुछ दिन पहले मंदिर के लिए एक ऊंट भी खरीदा गया था और उसे मंदिर लाया गया था. अब दुर्गा के रूप में एक और नया सदस्य मंदिर में शामिल हुआ है. असम से करीब 3000 किलोमीटर की दूरी तय करके मदुरै पहुंची दुर्गा का स्वागत जिस तरह फूल बरसाकर किया गया, वह वहां मौजूद श्रद्धालुओं के लिए भी खास मौका रहा. विनायक चतुर्थी के दिन मंदिर परिसर में दुर्गा के पहुंचने से इस मौके की तस्वीरें भी खास बन गईं.
 

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