फेडरेशन ऑफ इंडिया पायलट्स (FIP) ने देश में एविएशन सेक्टर की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. FIP ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को पत्र लिखकर पायलटों के लिए मौजूदा नियमों के तहत ओरल-फ्लुइड बेस्ड डोप टेस्ट शुरू करने का सुझाव दिया है.
DGCA को भेजे अपने पत्र में FIP ने सिफारिश की है कि मनोदैहिक पदार्थों के इस्तेमाल की जांच के लिए मौजूदा नियामक ढांचे में ओरल-फ्लुइड टेस्ट को एक पूरक पद्धति के रूप में शामिल किया जाए.
फिलहाल पायलटों की जांच के लिए यूरिन-टेस्ट सिस्टम लागू है, जिसके लिए एक लैब और फ्रेमवर्क मौजूद है. हालांकि, संगठन का मानना है कि भारतीय विमानन क्षेत्र का दायरा जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए जांच क्षमता बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है.
एयरपोर्ट्स पर तेजी से हो सकेगी जांच
FIP का कहना है कि ओरल-फ्लुइड टेस्ट लागू होने से एयरपोर्ट्स और दूसरे परिचालन स्थलों पर पायलटों की तुरंत जांच मुमकिन हो सकेगी. इससे उड़ानों के संचालन में होने वाली देरी और दूसरी बाधाओं को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी.
क्यों सख्त हो रही जांच?
दरअसल AI2379 उड़ान के पायलट-इन-कमांड के पॉजिटिव पाए जाने के बाद MoCA सख्त रुख अपना रहा है. MoCA ने DGCA को डोप टेस्ट से जुड़े नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं (CAR) के नियमों का रिव्यू करने के लिए कहा है था. मंत्रालय का मानना है कि एयरलाइंस को अपने पायलटों के डोप टेस्ट की जिम्मेदारी और गंभीरता से लेनी होगी.
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एअर इंडिया ने 13 अगस्त 2026 से अपने सभी पायलटों के लिए ये अनिवार्य जांच शुरू कर दी है. हाल ही में एअर इंडिया ग्रुप के 300 से 400 पायलटों के किए गए अनिवार्य साइकोएक्टिव सबस्टेंस टेस्ट में दो पायलटों की शुरुआती रिपोर्ट 'नॉन-नेगेटिव' आई थी. इसका मतलब है कि शुरुआती टेस्ट में किसी केमिकल की मौजूदगी का संकेत मिला है, हालांकि, इसे फाइनल रिपोर्ट नहीं माना गया.
अमित भारद्वाज