केंद्र सरकार ने ड्रग्स और सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों के त्वरित निपटारे के लिए राज्यों को विशेष और फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने के निर्देश दिए हैं. सरकार का कहना है कि एनडीपीएस (NDPS) कानून के तहत दर्ज करीब 3.9 लाख लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए अतिरिक्त विशेष अदालतों की जरूरत है.
इसी के साथ सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज होने वाले पेपर लीक मामलों की सुनवाई भी तेजी से पूरी कराने पर जोर दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही देश के चुनिंदा चार राज्यों और संबंधित हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में पेपर लीक मामलों के लिए नए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा कर चुके हैं.
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मध्य प्रदेश के चार जिलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट
केंद्र ने राज्यों से कहा है कि जहां लंबित मामलों का बोझ अधिक है, वहां तुरंत नई विशेष अदालतें बनाई जाएं. मध्य प्रदेश में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. राज्य में करीब 14 हजार NDPS मामले लंबित हैं और पहले कोई विशेष अदालत नहीं थी. ऐसे में केंद्र ने इंदौर, भोपाल, नीमच, मंदसौर, रीवा और सिंगरौली में 6 विशेष NDPS अदालतें गठित करने को कहा है.
वहीं कर्नाटक में करीब 15 हजार NDPS मामले लंबित हैं, जबकि वहां केवल तीन विशेष अदालतें काम कर रही हैं. इसी वजह से राज्य सरकार को अदालतों की संख्या बढ़ाने की सलाह दी गई है.
देशभर में 775 फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट पहले से चल रहे
केंद्र ने यह भी बताया कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की सुनवाई के लिए देशभर में 775 फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट पहले से संचालित हैं, जिन्हें हाल ही में आगे भी जारी रखने की मंजूरी दी गई है.
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सरकार का कहना है कि नई विशेष अदालतों का उद्देश्य जांच एजेंसियों, अभियोजन, गवाहों और अदालतों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि वर्षों से लंबित मामलों की रोजाना सुनवाई हो सके और उनका समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा सके. केंद्र ने सभी राज्यों से लंबित मामलों की संख्या के आधार पर जल्द से जल्द अतिरिक्त विशेष अदालतें स्थापित करने को कहा है.
संजय शर्मा