'रेवड़ी कल्चर' पर चुनाव आयोग सख्त! राजनीतिक दलों से कहा- घोषणा पत्र में योजनाओं के खर्च का ब्योरा देना होगा

निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को चिट्ठी लिखी है. इसमें कहा गया है कि वे अपने चुनावी घोषणा पत्रों को ज्यादा तार्किक, व्यवहारिक और धरातल पर जनता के ज्यादा करीब लाने लायक बनाएं. आयोग ने आदर्श चुनाव आचार संहिता में कई जगह बदलाव किए हैं.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 04 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST

निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों को ज्यादा तार्किक और व्यवहारिक बनाने के लिए सभी पार्टियों को चिट्ठी लिखी है. इसमें कहा गया है कि आम चुनाव में सभी पॉलिटिकल पार्टियों को अपने घोषणा पत्र में योजनाओं पर आने वाले खर्च और उसके लिए राजस्व अर्जित करने की योजना के बारे में भी बताना होगा. सिर्फ घोषणाएं कर देने भर से काम नहीं चलेगा.

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निर्वाचन आयोग ने कहा कि सभी राजनीतिक दल चुनावी घोषणा पत्रों को ज्यादा तार्किक, व्यवहारिक और धरातल पर जनता के ज्यादा करीब लाने लायक बनाएं.

आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार और आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय की अगुवाई में हुई बैठक में ये तय किया गया है कि घोषणा पत्र ज्यादा वास्तविक और व्यावहारिक हो. न कि हवा हवाई. यानी घोषणा पत्र वित्त आयोग, भारतीय रिजर्व बैंक, FRBM, CAG आदि की गाइड लाइन पर आधारित हो.

आयोग ने आदर्श चुनाव आचार संहिता में कई जगह बदलाव किए हैं. लिहाजा धारा-3 के प्रावधान तीन और धारा-8 M में बदलाव किया है. इसके मुताबिक राजनीतिक पार्टियों को घोषणा पत्र में अपनी योजनाओं के बारे में बताने के साथ ही ये भी बताना होगा कि योजनाओं के सफल और व्यवहारिक संचालन के लिए राजस्व यानी धन कैसे आएगा? 

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इतना ही नहीं, सरकार बनने के बाद कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष टैक्स, अतिरिक्त कर, खर्चे में कटौती, कहीं से कर्ज लेकर या फिर किसी अन्य स्रोत से धन जुटाया जाएगा, ये सब जनता को बताना होगा. यानी अब घोषणा पत्र के नाम पर जनता को भ्रमित नहीं किया जा सकता.

आयोग के मुताबिक जनता और राजनीतिक दलों के बीच इस कवायद से पारदर्शिता बढ़ेगी. राजनीतिक दल इस दिशा में गंभीरता से सोचें, तो आम वोटर को अपना मन बनाने में आसानी होगी.

वहीं सुप्रीम कोर्ट में भी फ्री बी का मामला लंबित है. 2 जजों की बेंच ने इसे संविधान से जुड़े पहलू वाला मामला मानते हुए इसे बड़ी पीठ के पास विचारार्थ ले जाने की सिफारिश की है. सुप्रीम कोर्ट में अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग ने खुद को पक्षकार न बनाए जाने की गुहार लगाई थी. लेकिन अब ये कदम उठाकर आयोग ने अपने सख्त इरादे जाता दिए हैं.

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