अल नीनो का अलर्ट! 12 राज्यों के 315 जिलों में कम बारिश की आशंका, कृषि मंत्री शिवराज ने बनाई मॉनिटरिंग सेल

अल नीनो के बढ़ते असर के बीच केंद्र सरकार ने कम बारिश की आशंका वाले इलाकों पर निगरानी बढ़ा दी है. कृषि मंत्रालय ने हालात पर नजर रखने के लिए विशेष मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाई है और राज्यों को जरूरी तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं.

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बैठक के बाद अल नीनो पर जानकारी देते हुए कृषि मंत्री श‍िवराज. (Photo: ITG) बैठक के बाद अल नीनो पर जानकारी देते हुए कृषि मंत्री श‍िवराज. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:11 PM IST

देश के कई हिस्सों में लोग अभी भी मॉनसून का इंतजार कर रहे हैं. इसी बीच अल नीनो के सक्रिय होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. कम बारिश की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खेती की तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हालात पर बैठक की और प्रभावित हो सकने वाले इलाकों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए. कृषि मंत्रालय के मुताबिक, अल नीनो के असर की निगरानी के लिए एक खास मॉनिटरिंग सेल और क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप को सक्रिय किया गया है, जो लगातार स्थिति पर नजर रखेंगे.

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बैठक में सामने आया कि अल नीनो का असर कई क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है. मंत्रालय के आकलन के अनुसार, देश के 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. इनमें 111 जिलों को सबसे संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है. इन इलाकों में सिंचाई की सुविधा सीमित है, जिससे खेती पर असर पड़ने की आशंका ज्यादा मानी जा रही है.

12 राज्यों पर सबसे ज्यादा असर का अनुमान

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश समेत 12 राज्यों में हालात ज्यादा चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं. कृषि मंत्रालय के अनुसार, अब तक सामान्य बारिश की तुलना में करीब 43 फीसदी कमी दर्ज की गई है. ऐसे में खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है. समीक्षा बैठक में राज्यों को निर्देश दिया गया कि तैयार योजनाओं को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जाए.

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कम बारिश वाले इलाकों के लिए अलग योजना

सरकार ने कम बारिश वाले जिलों के लिए एक खास इमरजेंसी प्लान लागू करने का फैसला किया है. स्थानीय जरूरतों के हिसाब से जिला कृषि संकट योजना को नए सिरे से अपडेट किया जा रहा है, ताकि मौसम की मार से किसानों को कम से कम नुकसान हो.

बैठक में जल संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही गई. तालाब, चेक डैम और खेत-तालाब जैसी संरचनाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलें अपनाने और फसल विविधीकरण बढ़ाने की सलाह दी गई है.

बुवाई में जल्दबाजी नहीं करने की अपील

कृषि मंत्री के मुताबिक, कृषि विज्ञान केंद्र और डिजिटल माध्यमों से किसानों तक समय पर जरूरी सलाह पहुंचाई जाएगी. सरकार ने किसानों से अपील की है कि जब तक पर्याप्त बारिश न हो जाए, तब तक बुवाई की जल्दबाजी बिल्कुल न करें. मध्य प्रदेश समेत कई इलाकों में अभी खरीफ की बुवाई बड़े पैमाने पर शुरू नहीं हुई है, इसलिए आने वाले दिनों का मौसम बेहद अहम रहेगा. सरकार ने साफ भरोसा दिया है कि देश में अनाज का पर्याप्त स्टॉक है, खाद्य सुरक्षा पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी.
 

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