असम और बंगाल में 16 ठिकानों पर ED की छापेमारी, म्यांमार सीमा से विदेशी सुपारी तस्करी पर एजेंसी का एक्शन

ED ने भारत-म्यांमार सीमा से विदेशी सुपारी तस्करी करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ असम और पश्चिम बंगाल में 16 स्थानों पर छापेमारी की. सिंडिकेट इंडोनेशिया और थाईलैंड से सुपारी म्यांमार के रास्ते मिजोरम में लाकर जाली जीएसटी और ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई करता था,

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असम-बंगाल में 16 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी. (File photo: ITG) असम-बंगाल में 16 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी. (File photo: ITG)

मुनीष पांडे

  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:42 PM IST

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुवाहाटी जोनल कार्यालय की टीम ने गुरुवार को असम और पश्चिम बंगाल में 16 स्थानों पर छापेमारी की. ये कार्रवाई भारत-म्यांमार सीमा के रास्ते विदेशी मूल की सुपारी भारत में तस्करी करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई.

अधिकारियों ने सिलीगुड़ी के ट्रांसपोर्टर धीरज घोष, उनके सहयोगियों बिनय बर्मन और संदीप बैद, गुवाहाटी की फर्मों जय करणी ट्रेडिंग्स प्राइवेट लिमिटेड और पूर्वोत्तर एग्रो प्राइवेट लिमिटेड समेत व्यापारी नवरतन बैद के ठिकानों पर छापेमारी की.

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इंडोनेशिया-थाईलैंड से मिजोरम के रास्ते सुपारी की तस्करी

ईडी सूत्रों के अनुसार, ये सिंडिकेट इंडोनेशिया और थाईलैंड की सुपारी को म्यांमार के रास्ते मिजोरम में लाता था. स्थानीय निवासियों को फ्रंट प्रोप्राइटर बनाकर फर्में खड़ी की जाती थीं, जिनके माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये का लेन-देन किया जाता था. बाद में इस पूरे नेटवर्क के जरिए विदेशी सुपारी को देश के अलग-अलग हिस्सों में खपाया जा रहा था.

नकली GST और ट्रांसपोर्ट डॉक्यूमेंट से सप्लाई

विदेशी सुपारी को मिजोरम लाने के बाद सिंडिकेट फर्जी जीएसटी और जाली ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था. इन जाली कागजातों के सहारे खेप को उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के गुटखा और पान मसाला निर्माताओं तक सुरक्षित पहुंचाया जाता था. इस अवैध कारोबार में कई राज्यों के कारोबारी शामिल रहे हैं.

आरोप है कि सिलीगुड़ी आधारित सिंडिकेट ट्रक चालकों से हर महीने तय रकम वसूलता था. इसके बदले उन्हें खास टोकन दिए जाते थे. इस टोकन की मदद से असम सीमा से होते हुए बंगाल और बिहार तक ट्रकों की बेरोकटोक आवाजाही सुनिश्चित कराई जाती थी. ईडी अब इस पूरे वित्तीय तंत्र की जांच कर रही है.

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