नीट पेपर लीक विवाद सिर्फ परीक्षा की गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा. बीते महीने से ये देश की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल बन चुका था. जंतर मंतर पर हफ्तों से चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP का प्रदर्शन, संसद का लगातार ठप होना, विपक्ष का सड़क पर उतरना और अब खुद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा.
25 जुलाई 2026 को आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. साथ ही केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक करने वालों के खिलाफ सख्त कानून वाले एक नए ड्राफ्ट बिल को भी मंजूरी दे दी है, जिसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है. आइए अब पेपर लीक से लेकर इस्तीफे तक की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं.
यह पूरा विवाद मई 2026 में शुरू हुआ था. 3 मई 2026 को देशभर में NEET UG परीक्षा हुई थी, जिसमें करीब 22 से 24 लाख छात्र शामिल हुए थे. परीक्षा के कुछ दिन बाद, यानी 7 मई के आसपास, शिकायतें आने लगीं कि गेस पेपर के नाम पर असली सवाल पहले ही लीक हो चुके थे. इन शिकायतों के बाद हड़कंप मच गया और 12 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी. इसके साथ ही CBI ने भी मामले की जांच शुरू कर दी.
15 मई को खुद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक प्रेस ब्रीफिंग में यह स्वीकार किया कि पेपर लीक हुआ है. उन्होंने कहा कि यह गड़बड़ी कमांड चेन में हुई एक चूक की वजह से हुई. इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया.
इसी दौरान एक और दिलचस्प घटना हुई. 15 और 16 मई को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी वायरल हो गई, जिसमें उन्होंने कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल किया था. इसी टिप्पणी से प्रेरित होकर 16 मई को अभिजीत दिपके नाम के एक व्यक्ति ने मजाकिया अंदाज में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP नाम का एक संगठन बनाया.
शुरुआत में यह सिर्फ एक ऑनलाइन मजाक जैसा लगा, लेकिन कुछ ही दिनों में इससे लाखों लोग जुड़ गए. जैसे ही NEET परीक्षा रद्द होने की खबर आई, यही मजाकिया मंच युवाओं के गुस्से और आक्रोश को जाहिर करने का सबसे बड़ा जरिया बन गया.
जून के महीने में यह आंदोलन और तेज हो गया. 6 जून को CJP ने अपना पहला बड़ा प्रदर्शन दिल्ली के जंतर मंतर पर किया. प्रदर्शनकारियों की तीन मुख्य मांगें थीं. पहली, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें. दूसरी, परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार किए जाएं. और तीसरी, जिन छात्रों ने इस तनाव के चलते आत्महत्या कर ली, उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाए.
20 जून से यह प्रदर्शन और गंभीर हो गया, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया. उनका कहना था कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक वे जंतर मंतर से नहीं हटेंगे. इसी बीच जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़ गए और भूख हड़ताल पर बैठ गए, जो करीब 26 दिनों तक चली.
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देखते ही देखते CJP का प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया और जंतर मंतर पर हजारों की संख्या में छात्र, युवा और समर्थक जमा होने लगे. इसी बीच 21 जून को NEET की दोबारा परीक्षा हुई और उसके नतीजे भी जल्दी ही घोषित कर दिए गए, लेकिन इससे लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ.
जुलाई का महीना इस पूरे विवाद का सबसे तनावपूर्ण दौर साबित हुआ. 20 जुलाई को CJP ने चलो संसद नाम से एक बड़े मार्च का ऐलान किया. पुलिस ने इस मार्च की इजाजत नहीं दी थी, लेकिन इसके बावजूद हजारों प्रदर्शनकारी संसद की तरफ बढ़ चले. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े, जिसमें कई लोग घायल हो गए. इसके बावजूद जंतर मंतर पर धरना जारी रहा.
उसी दिन और उसके बाद के दिनों में विपक्ष भी सड़क पर उतर आया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई बड़े नेताओं ने प्रधानमंत्री के आवास लोक कल्याण मार्ग की तरफ मार्च किया. पुलिस ने इन नेताओं को हिरासत में ले लिया. विपक्ष ने तीन मुख्य मांगें रखीं, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई की जांच हो, और छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगी जाए.
इसी दौरान संसद का मॉनसून सत्र भी शुरू हो चुका था, लेकिन यह शुरू होते ही NEET मुद्दे पर पूरी तरह ठप हो गया. विपक्षी सांसद रोज संसद के वेल में जाकर नारेबाजी कर रहे थे और धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो के नारे लगा रहे थे. इसकी वजह से लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही बार बार स्थगित करनी पड़ी.
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सरकार बार बार कह रही थी कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष का कहना था कि पहले धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, उसके बाद ही कोई चर्चा होगी. 24 जुलाई तक संसद के कई दिन इसी हंगामे की भेंट चढ़ चुके थे. राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कह दिया था कि जब तक प्रधान इस्तीफा नहीं देते और प्रधानमंत्री माफी नहीं मांगते, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी.
इसी बीच 23 जुलाई की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद एक वीडियो संदेश जारी किया. इस वीडियो में उन्होंने कई अहम बातें कहीं. उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे ताकि ऐसे मामलों का जल्दी निपटारा हो सके.
उन्होंने यह भी बताया कि सख्त सजा का प्रावधान रखने वाला एक नया बिल जल्द ही कैबिनेट के सामने लाया जाएगा, और अगले हफ्ते उसे संसद में पास कराने की कोशिश की जाएगी. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि छात्रों का भविष्य सबसे ज्यादा जरूरी है और इस मामले में कई दोषी पहले से ही जेल में हैं. यह वीडियो संदेश ऐसे समय पर आया जब एक तरफ CJP का प्रदर्शन चल रहा था और दूसरी तरफ संसद पूरी तरह ठप पड़ी थी.
प्रधानमंत्री ने फिर 24 जुलाई को फिर एक वीडियो संदेश जारी किया. वीडियो के सजिए युवाओं को संदेश दिया.
आखिरकार 24 जुलाई को इस पूरे विवाद में एक बड़ा मोड़ आया. केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान वाले ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी, जिसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा का प्रावधान शामिल है. इसी दिन CJP के दो प्रतिनिधि, सौरव दास और आशुतोष रंका, केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा और जितेंद्र सिंह से दूसरी बार मिले. यह मुलाकात कॉन्स्टीट्यूशन क्लब और विज्ञान भवन में हुई.
इस मुलाकात में CJP ने अपनी तीन मांगें फिर से दोहराईं. पहली मांग थी कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें या उन्हें पद से हटाया जाए, और यह मांग किसी भी सूरत में बदली नहीं जाएगी. दूसरी मांग थी कि जिन NEET उम्मीदवारों ने आत्महत्या कर ली, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए. तीसरी मांग थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और केस वापस लिए जाएं, और 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए.
सरकार ने इनमें से दो मांगों, यानी मुआवजा देने और केस वापस लेने पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जता दी. लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मामले में सरकार ने कुछ समय मांगा और कहा कि इस पर फैसला 25 जुलाई की दोपहर तक बताया जाएगा. CJP ने इसके जवाब में साफ कर दिया कि इस्तीफे की मांग पर कोई समझौता नहीं होगा और प्रदर्शन जारी रहेगा.
शुरुआत में सरकारी सूत्रों का कहना था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा फिलहाल एजेंडे में नहीं है और सरकार का पूरा ध्यान परीक्षा सुधार, सुरक्षित सिस्टम और सख्त कानून बनाने पर है. लेकिन आखिरकार शनिवार यानी 25 जुलाई को क़रीब दोपहर दो बजे धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. फिलहाल जंतर मंतर पर धरना जारी है और आने वाले दिनों में सरकार और CJP के बीच बातचीत का अगला दौर भी हो सकता है. संसद में भी गतिरोध अभी बना हुआ है.
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