'प्रदर्शनकारियों पर नहीं चली गोली', राहुल के बयान का दिल्ली पुलिस ने किया फैक्ट चेक

दिल्ली पुलिस ने फैक्ट चेक कर कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे इस दावे की कि 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लगी थी. इसकी पुष्टि नहीं हुई है.

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राहुल गांधी ने पुलिस के बलप्रयोग को लेकर निशाना साधा है. (Photo: PTI) राहुल गांधी ने पुलिस के बलप्रयोग को लेकर निशाना साधा है. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:13 PM IST

जंतर-मंतर  पर 20 जुलाई के स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल पर कोहराम मचा हुआ है. सड़क से लेकर संसद पर इसकी चर्चा है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा. 

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने की खबरों का खंडन किया है. दिल्ली पुलिस ने फैक्ट चेक कर कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे इस दावे की कि 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लगी थी. इसकी पुष्टि नहीं हुई है. मेडिको-लीगल केस यानी एमएलसी की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि नहीं होती.

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एमएलसी के अनुसार, घायल शख्स के दाहिने कान के सामने (राइट ट्रेगस के सामने) चीरे जैसा घाव है, जो किसी तेजधार वाली चीज से हुई है. डॉक्टर की राय के अनुसार, यह साधारण चोट है और एमएलसी में गोली लगने का कोई प्रमाण नहीं मिला है इसलिए, एमएलसी रिपोर्ट में गोली लगने का समर्थन नहीं मिला है. जनता से अपील है कि ऐसे किसी भी दावे से पहले उसकी प्रामाणिक स्रोतों से पुष्टि अवश्य करें.

दिल्ली में 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बीती 25 जुलाई को पत्र लिखा था. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सुरक्षाबलों ने अंधाधुंध बल प्रयोग किया और पूरे मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए.

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ता दें कि पेपर लीक के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी के 20 जुलाई को बुलाए गए 'संसद चलो' मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी. याचिका में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर नागरिकों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पैलेट गन (प्रोजेक्टाइल एक्शन गन) के इस्तेमाल पर रोक लगाने और घायल लोगों को मुआवजा देने की मांग की गई थी.

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