सोनम वांगचुक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका, अदालत ने दिए FIR दर्ज करने के निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 जुलाई को जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. याचिका में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने, विशेष जांच दल से जांच कराने और सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया है.

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सोनम वांगचुक ने सरकार को पत्र लिखा है सोनम वांगचुक ने सरकार को पत्र लिखा है

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST

सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को जंतर-मंतर से हटाए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यह याचिका जनहित में दायर की गई प्रतीत होती है. अदालत ने कहा कि याचिका में मांग की गई है कि 18 जुलाई को प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान हुई घटना की एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिए जाएं.

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याचिकाकर्ता ने मामले की एसआईटी (विशेष जांच दल) से जांच कराने और घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी अनुरोध किया है. याचिका में यह भी मांग की गई है कि पुलिस को सोनम वांगचुक या भूख हड़ताल पर बैठे अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दमनात्मक (Coercive) कार्रवाई करने से रोका जाए.

इसके अलावा अदालत से अनुरोध किया गया है कि प्रदर्शनकारियों को परेशान न किया जाए और उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करने के अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी जाए. हाईकोर्ट ने कहा कि यह याचिका 18 जुलाई को जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे सोनम वांगचुक से जुड़े घटनाक्रम पर आधारित है. हालांकि, अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इसी मामले में सोनम वांगचुक की पत्नी पहले ही एक रिट याचिका दायर कर चुकी हैं, जिस पर अदालत आदेश पारित कर चुकी है.

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उधर, सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने की बात कही है. हालांकि इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार के सामने शर्त भी रखी है. वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर दोनों नेताओं के अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात करने और अनशन खत्म करने की अपील के लिए धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान सरकार की ओर से उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया गया है.

वांगचुक ने अपने पत्र में मांग करते हुए कहा कि पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए. इसके साथ ही जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा होनी चाहिए. इसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार भी शामिल होना चाहिए. उन्होंने 20 जुलाई 2026 को हुए 'चलो संसद' मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस की कथित ज्यादती और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के बावजूद प्रदर्शन बेहद शांतिपूर्ण रहा.

पूरे देश और दुनिया ने प्रदर्शनकारियों का धैर्य और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने की प्रतिबद्धता देखी है. वांगचुक ने उम्मीद जताई कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी मामलों, उत्पीड़न या बदले की कार्रवाई के जरिए लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनके विश्वास को और कमजोर नहीं किया जाएगा.

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