दिल्ली हाई कोर्ट ने इसी साल अगस्त में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों की वजह से राजधानी में नागरिकों को हुई परेशानी को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदर्शनों के नाम पर राजधानी को बंधक नहीं बनाया जा सकता है. अदालत ने केंद्र सरकार और पुलिस से सवाल किया कि ऐसे विरोध स्थलों को शहर के बीचों-बीच क्यों चलने दिया जाए?
एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमित महाजन ने स्पष्ट किया कि हालांकि नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन इससे आम जनता, ट्रैफिक और एम्बुलेंस जैसी सेवाओं के लिए पूरा शहर नहीं रुकना चाहिए. जबकि आगामी 15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोहों के मद्देनजर इलाके में निषेधाज्ञा लागू है. सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं.
अदालत ने दिल्ली पुलिस को प्रदर्शन की अनुमति संबंधी आवेदन पर नियमानुसार उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया. ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमिटी' ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगने वाली अर्जी पर दिल्ली पुलिस को फैसला लेने का निर्देश देने के लिए याचिका दायर की थी.
इस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह प्रदर्शन करने के लोकतांत्रिक अधिकार यानी अनुच्छेद 19 पर सवाल नहीं उठा रहा है. लेकिन विरोध प्रदर्शनों के कारण पूरे शहर को जाम या ठप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
सुरक्षा और 15 अगस्त की पाबंदियों का जिक्र करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि स्वतंत्रता दिवस नजदीक होने के कारण इलाके में पहले से ही निषेधाज्ञा (धारा 163/पुरानी धारा 144) लागू है.
हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह शनिवार (8 अगस्त) तक याचिकाकर्ता के आवेदन पर अंतिम फैसला ले और इस याचिका का निपटारा कर दिया.
संजय शर्मा