CJP का आंदोलन, विपक्ष का दांव और प्रधान का सरेंडर... Gen-Z आंदोलन के 7 निर्णायक चैप्टर

NEET-UG विवाद, CJP का गठन, जंतर-मंतर का आंदोलन, सोनम वांगचुक का साथ और आखिर में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा. जानिए कैसे करीब दो महीने में यह पूरा घटनाक्रम आगे बढ़ा.

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जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक चला NEET पेपर लीक के खिलाफ बड़ा आंदोलन. (Photo: ITG) जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक चला NEET पेपर लीक के खिलाफ बड़ा आंदोलन. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:54 PM IST

NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों से उठे सवाल धीरे-धीरे देश के सबसे चर्चित छात्र आंदोलन में बदल गए. 3 मई की परीक्षा से शुरू हुई यह कहानी जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक चले धरने, संसद मार्च और कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों से गुजरते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक पहुंची. आइए जानते हैं Gen-Z आंदोलन के 7 ऐसे चैप्टर, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी.

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3 मई से शुरू हुई विवाद की पूरी कहानी

इस पूरी कहानी की शुरुआत 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा से होती है. परीक्षा खत्म होते ही धांधली के गंभीर सवाल खड़े हो गए. इसके बाद 12 मई को जब गड़बड़ियों का बड़ा खुलासा हुआ, तो छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा. देखते ही देखते सोशल मीडिया पर पोस्ट का दौर चल पड़ा, जिसने इस बड़े आंदोलन की नींव रख दी.

15 मई को CJI का कॉकरोच वाला बयान

15 मई 2026 को एक मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी आई कि कुछ लोग रोजगार न मिलने पर सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर व्यवस्था पर हमला करते हैं. इस दौरान उनकी तुलना 'कॉकरोच' जैसे शब्द से की गई. हालांकि अगले दिन इस बयान पर सफाई दी गई कि यह सिर्फ फर्जी डिग्री वालों के लिए था, लेकिन तब तक छात्रों में नाराजगी बढ़ चुकी थी.

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16 मई को बनी CJP का गठन

CJI की टिप्पणी के विरोध में 16 मई 2026 को अभिजीत दिपके ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का ऐलान किया. यह मुहिम शुरुआत में सोशल मीडिया पर एक बड़े अभियान के रूप में सामने आई. छात्रों ने इसके जरिए परीक्षा में धांधली के खिलाफ अपनी एकजुटता दिखाई और व्यवस्था पर सवाल खड़े किए.

6 जून को दिपके की इंडिया में एंट्री

6 जून 2026 को CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके अमेरिका से भारत लौटे. दिल्ली पहुंचते ही उन्होंने जंतर-मंतर पर डेरा डाल दिया और आंदोलन को जमीन पर उतार दिया. CJP ने परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुरजोर मांग उठाई.

28 जून को सोनम वांगचुक का मिला साथ 

28 जून को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए. लगातार 20 दिनों तक अनशन पर रहने के बाद बिगड़ती सेहत को देखते हुए 18 जुलाई को उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. बाद में मेदांता अस्पताल में जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया. सरकार ने आश्वासन दिया कि छात्रों पर केस दर्ज नहीं होंगे, संसद में जवाबदेही तय होगी और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा.

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संसद मार्च बना सबसे बड़ा मोड़

20 जुलाई 2026 को CJP ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च निकाला. पुलिस ने बिना अनुमति आगे बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की, जिसके बाद लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ. इस घटना में कई छात्र घायल हुए, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से आंदोलन पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया.

25 जुलाई को आया वो फैसला

लगातार बढ़ते दबाव के बीच 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया. यह खबर सामने आते ही जंतर-मंतर का माहौल बदल गया. प्रदर्शनकारियों ने एक-दूसरे को बधाई दी, जश्न मनाया और CJP ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया. हालांकि छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है. उनका मकसद परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कराना है, ताकि भविष्य में किसी छात्र को ऐसे विवाद का सामना न करना पड़े.

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