भारत मंडपम में PM मोदी और BRICS नेताओं ने लगाए बरगद के पौधे, जानिए क्या है संदेश

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य सदस्य देशों के नेताओं ने भारत मंडपम परिसर में बरगद के पौधे लगाए.

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी समेत सदस्य देशों के नेताओं ने बरगद के पौधे रोपे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी समेत सदस्य देशों के नेताओं ने बरगद के पौधे रोपे

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:52 PM IST

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नौ अन्य सदस्य देशों के नेताओं ने भारत मंडपम परिसर में बरगद के पौधे लगाए. दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के दौरान कुल 10 पौधे लगाए गए. यह पहल प्रधानमंत्री मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान और BRICS की इस साल की थीम से जोड़कर की गई.

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भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी समेत कई नेता हिस्सा ले रहे हैं. शनिवार शाम प्रधानमंत्री मोदी और अन्य नेताओं ने भारत मंडपम में आयोजित 'भारत इनोवेट्स एग्जीबिशन' का दौरा किया. इसके बाद सभी नेता परिसर के लॉन में पहुंचे और एक कतार में खड़े होकर एक-एक पौधा लगाया. लगाए गए सभी पौधे बरगद के थे.

'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जुड़ी पहल

भारत के BRICS शेरपा सुधाकर दलेला ने बताया कि नेताओं द्वारा पौधारोपण 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अनुरूप है. यह BRICS शिखर सम्मेलन की थीम 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' से भी जुड़ा है. उन्होंने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता प्रधानमंत्री मोदी के 'Humanity First' के नजरिये पर आधारित है.

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भारत ने 1 जनवरी को BRICS की अध्यक्षता संभाली थी. 2026 में BRICS अपनी स्थापना के 20 वर्ष भी पूरे कर रहा है. इस अवसर पर शिखर सम्मेलन के पहले दिन दो स्मारक डाक टिकट भी जारी किए गए.

मतभेदों के बावजूद संयुक्त घोषणा-पत्र पर सहमति

शिखर सम्मेलन के पहले दिन नई दिल्ली घोषणा-पत्र को भी अपनाया गया. पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच मतभेदों के बावजूद सदस्य देश साझा घोषणा-पत्र पर सहमत हुए. हालांकि इसमें ईरान पर अमेरिकी हमलों या खाड़ी के अरब देशों पर ईरानी सेना के हमलों का सीधे उल्लेख नहीं किया गया. सहमति बनने के सवाल पर दलेला ने कहा कि विभिन्न स्तरों पर लगातार बातचीत चल रही थी और इन्हीं प्रयासों की वजह से सदस्य देश आम सहमति बनाने में सफल रहे.

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