शी जिनपिंग अपने 'राइट हैंड' को भी लाए भारत, बीजिंग में क्यों बोलती है इनकी तूती?

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत यात्रा के दौरान उनके साथ कैई ची भी होंगे, जिन्हें चीन का दूसरा सबसे शक्तिशाली नेता और शी का करीबी सहयोगी माना जाता है. करीब सात साल बाद शी की भारत यात्रा में कैई की मौजूदगी को दोनों देशों के रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कैई ची. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कैई ची.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:30 PM IST

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत पहुंच चुके हैं. उनके साथ एक लंबे कद के, चांदी जैसे बालों वाले अधिकारी भी हैं. यह कैई ची हैं, जिन्हें चीन का दूसरा सबसे शक्तिशाली नेता और शी जिनपिंग का दाहिना हाथ माना जाता है. कम्युनिस्ट पार्टी में उनका उभार असामान्य रूप से तेजी से हुआ है. शी के साथ उनकी मौजूदगी बताती है कि चीन भारत दौरे को कितना महत्व दे रहा है और घातक सीमा संघर्षों के बाद भारत के साथ संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है.

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शनिवार को चीन ने एक बयान में कहा कि शी जिनपिंग के साथ आने वाले प्रतिनिधिमंडल में कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य कैई ची और विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं. करीब सात साल बाद शी की यह पहली भारत यात्रा होगी. हालांकि, पर्दे के पीछे काम करने वाले गोपनीय स्वभाव के कैई ची की मौजूदगी ने खासा ध्यान खींचा है.

हाल के समय में कैई ची सार्वजनिक तौर पर अधिक नजर आए हैं. पिछले साल शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के लिए तियानजिन यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की थी. 2025 में दक्षिण कोरिया में शी-जिनपिंग और ट्रंप की बैठक के दौरान भी वह नजर आए थे. इस साल की शुरुआत में जब ट्रंप चीन पहुंचे तो अमेरिकी राष्ट्रपति का हाथ मिलाने वाला पहला व्यक्ति कैई ची था. ये भले ही छोटे संकेत हों, लेकिन इनसे शी की नजर में कैई की स्थिति का पता चलता है.

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यह कोई रहस्य नहीं है कि चीन अपनी शक्तिशाली सरकार के काम करने के तरीके के बारे में बहुत कम जानकारी देता है. कैई ची पर अचानक बढ़ी नजर चीन के सत्ता के प्रमुख खिलाड़ियों और बीजिंग की भविष्य की दिशा की एक झलक देती है.

कौन हैं चीन के कैई ची?

कैई ची ने पहली बार अपने तेजी से हुए प्रमोशन के बाद मीडिया का ध्यान खींचा. 2017 में उन्हें सीधे सत्तारूढ़ पोलित ब्यूरो में जगह दी गई, जो पार्टी का दूसरा सबसे बड़ा निर्णय लेने वाला निकाय है. यह नियुक्ति बीजिंग के कम्युनिस्ट पार्टी प्रमुख बनाए जाने के कुछ महीनों बाद हुई. बीजिंग पार्टी प्रमुख राजधानी के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से एक होते हैं.

यह पदोन्नति भी बीजिंग के मेयर के तौर पर कुछ ही महीने काम करने के बाद हुई थी. आम तौर पर इस तरह का बदलाव कम से कम पांच साल लेता है. यानी उन्हें केंद्रीय समिति के निचले स्तर से आगे बढ़ने की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ा.

2022 में वह पार्टी की सात सदस्यीय पोलित ब्यूरो स्थायी समिति का हिस्सा बने, जो चीन में राजनीतिक सत्ता का सर्वोच्च केंद्र है. इस साल की शुरुआत में 70 वर्षीय कैई को कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय विचारधारा स्कूल का प्रमुख बनाया गया. यह प्रतिष्ठित अकादमी नए अधिकारियों को प्रशिक्षित करती है और पार्टी की विचारधारा को आकार देती है. इसके अलावा वह पार्टी के जनरल ऑफिस का भी नेतृत्व करते हैं, जिससे वह शी जिनपिंग के वास्तविक चीफ ऑफ स्टाफ बन जाते हैं. इन पदों ने एक ही अधिकारी के हाथों में सत्ता का असामान्य केंद्रीकरण किया है. इससे कैई की स्थिति शी जिनपिंग के सबसे करीबी और भरोसेमंद सहयोगियों में से एक के तौर पर और मजबूत होती है.

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कैसे बने शी जिनपिंग के भरोसेमंद जनरल?

कैई ची शी जिनपिंग के दाहिने हाथ कैसे बने, इसे समझने के लिए दोनों की शुरुआती पृष्ठभूमि पर नजर डालनी होगी. दोनों का बैकग्राउंड काफी हद तक समान है. कैई और शी, दोनों ने सांस्कृतिक क्रांति के दौरान worker-peasant-soldier छात्रों के तौर पर शुरुआत की थी. इसके बाद दोनों ने दो दशक से अधिक समय तक साथ काम किया और फुजियान तथा झेजियांग के तटीय प्रांतों में सेवा दी. यहीं दोनों की दोस्ती मजबूत हुई.

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