जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 राज्यसभा में पारित हो गया है. लोकसभा से यह विधेयक 31 जुलाई 2026 को ही पारित हो चुका था. अब यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है.
इस संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है, ताकि फर्जी जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने जैसी खामियों पर रोक लगाई जा सके.
इस संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान देरी से होने वाले रजिस्ट्रेशन (Delayed Registration) से जुड़ा है. वर्तमान व्यवस्था में निर्धारित समय सीमा के बाद जन्म या मृत्यु का पंजीकरण विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों की अनुमति से कराया जा सकता था. लेकिन अब यदि जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद पंजीकरण कराया जाता है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) की अनुमति अनिवार्य होगी. सरकार का मानना है कि इससे देर से होने वाले पंजीकरण की कानूनी जांच मजबूत होगी और फर्जी दस्तावेज बनवाने की संभावनाएं काफी हद तक कम होंगी.
सरकार यह बदलाव क्यों लाई?
केंद्र सरकार के अनुसार, जन्म प्रमाणपत्र किसी भी नागरिक की पहली कानूनी पहचान (Legal Identity) होता है. इसी के आधार पर आगे चलकर आधार कार्ड, पासपोर्ट, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने, स्कूल-कॉलेज में प्रवेश, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और कई अन्य सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होती है.
यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण वर्षों बाद बिना पर्याप्त जांच के हो जाए, तो फर्जी पहचान, धोखाधड़ी, संपत्ति विवाद और सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका बढ़ जाती है. इसलिए सरकार ने देरी से होने वाले पंजीकरण के लिए न्यायिक अनुमति का प्रावधान किया है.
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
जो लोग निर्धारित समय के भीतर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराते हैं, उनके लिए इस संशोधन से कोई अतिरिक्त प्रक्रिया नहीं होगी. हालांकि, यदि कोई व्यक्ति दो वर्ष से अधिक की देरी के बाद पंजीकरण कराना चाहता है, तो उसे अब प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट से अनुमति प्राप्त करनी होगी. इससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल वास्तविक और प्रमाणित मामलों में ही देर से पंजीकरण किया जाए.
2023 के कानून से क्या संबंध है?
यह संशोधन जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 की अगली कड़ी माना जा रहा है. 2023 में केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु का राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस तैयार करने, राज्यों के बीच डेटा साझा करने और जन्म प्रमाणपत्र को कई सरकारी सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में मान्यता देने का प्रावधान किया था. 2026 का संशोधन उसी व्यवस्था को और मजबूत बनाता है और विशेष रूप से देरी से होने वाले पंजीकरण पर कानूनी निगरानी बढ़ाता है.
संसद में क्या हुआ?
विधेयक पहले लोकसभा से पारित हुआ और उसके बाद राज्यसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी. लोकसभा ने इसे 31 जुलाई 2026 को पारित किया था. सरकार ने सदन में कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य आम नागरिकों को परेशान करना नहीं, बल्कि जन्म और मृत्यु से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ाना और फर्जी प्रमाणपत्रों पर प्रभावी रोक लगाना है.
जितेंद्र बहादुर सिंह