पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर AK-47 तानने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है. राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है. इसमें आरोप लगाया गया है कि बिहार के सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 राइफल का इस्तेमाल किया गया. साथ ही 20 जुलाई से शुरू हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित अत्यधिक पुलिस बल प्रयोग के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है.
बता दें कि, नीट पेपर लीक मामले को लेकर शनिवार को बिहार बंद के दौरान हुए उग्र प्रदर्शन के बीच सीवान में AK-47 से हवाई फायरिंग करने वाले जवान को निलंबित किया जा चुका है. सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले का संज्ञान लिया और कार्रवाई करते हुए जवान को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया. जवान की पहचान एसआईटी टीम में तैनात अभिषेक पटेल के रूप में हुई है.
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में छात्र और प्रदर्शनकारी सिवान के गांधी मैदान में जुटने लगे थे. इसके बाद प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया. प्रदर्शनकारियों ने शहर के कई हिस्सों में हंगामा किया, पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ी और गांधी मैदान व जेपी चौक के पास पुलिस पर पथराव किया. इस दौरान सिवान के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पुराण कुमार झा घायल हो गए थे. उनके पैर में चोट आई लगी थी. वहीं कई पुलिसकर्मी और ड्यूटी पर मौजूद पत्रकार भी पथराव की चपेट में आकर घायल हुए थे.
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब भीड़ नहीं मानी तो लाठीचार्ज किया गया. इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया गया. इसी दौरान एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक जवान AK-47 से हवाई फायरिंग करता दिखाई दिया. वीडियो वायरल होने के बाद इस कार्रवाई पर सवाल उठे, जिसके बाद विभागीय जांच शुरू की गई.
प्रारंभिक जांच में जवान की पहचान अभिषेक पटेल के रूप में होने के बाद उसे निलंबित कर दिया गया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराई जा रही है. यदि जांच में किसी अन्य पुलिसकर्मी की भूमिका भी सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. उधर छात्रों के मुद्दे पर SC में दायर तमाम याचिकाओं की सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि हर नागरिक की सुरक्षा जरूरी है. यदि कहीं पुलिस या किसी अन्य पक्ष की ओर से ज्यादती हुई है तो उसे रोका जाना चाहिए. इसके लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल होने चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि मामला केवल दिल्ली का नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में ऐसे प्रदर्शन हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को एक साथ सुनने का फैसला किया है. अब छात्र प्रदर्शन, कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी सभी याचिकाओं पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई होगी.
अनीषा माथुर