भोजपुर एनकाउंटर का मामला सम्राट चौधरी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है क्योंकि अब सत्ताधारी बीजेपी के भीतर से ही सवाल उठाए जा रहे हैं. बीजेपी के कई नेताओं और मंत्रियों ने उस पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई है जिसमें भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई.
इस एनकाउंटर की पहले से ही जांच चल रही है और बीजेपी नेताओं की टिप्पणियों ने इस बात पर और ध्यान खींचा है कि क्या इस घटना को अलग तरह से संभाला जा सकता था और क्या पुलिस ने सही प्रक्रियाओं का पालन किया था.
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने इस घटना को दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया और संकेत दिया कि प्रशासन की ओर से लापरवाही हो सकती है. सिन्हा ने कहा कि यह घटना बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है. सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है. प्रशासन स्थिति को सुलझा सकता था, लेकिन लापरवाही हुई है. पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है.
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य बिहार को भ्रष्टाचार और अपराध से मुक्त बनाना है, लेकिन निर्दोष लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि बदले की भावना या नकारात्मक सोच के कारण किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाना चाहिए. न्याय सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है. लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा.
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी ऑपरेशन को संभालने के तरीके पर सवाल उठाए. तिवारी ने कहा, 'भोजपुर की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. सोशल मीडिया पर जो देखा गया है, वह अच्छा नहीं है. पुलिस को पहले आरोपी के आपराधिक इतिहास की जांच करनी चाहिए थी. अगर कोई ऐसा विकल्प संभव था जिसमें जान न जाए, तो उस पर विचार किया जाना चाहिए था.'
उन्होंने बताया कि चार पुलिसकर्मियों को पहले ही सस्पेंड कर दिया गया है और कहा कि आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी.
भोजपुर से आने वाले बीजेपी नेता ऋतुराज सिन्हा ने घटना की विस्तृत जांच की मांग की. सिन्हा ने कहा, 'भरत भूषण तिवारी की मौत दुखद और चिंताजनक है. कानून-व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि रक्षक ही भक्षक न बन जाएं.'
उन्होंने कहा कि शाहाबाद इलाके में लोगों का गुस्सा जायज है और न्यायिक जांच की मांग की. उन्होंने कहा, 'वायरल वीडियो साफ दिखाते हैं कि विस्तृत जांच जरूरी है. ऐसा लगता है कि एनकाउंटर से जुड़े दिशानिर्देशों का ठीक से पालन नहीं किया गया होगा.'
बक्सर से बीजेपी विधायक आनंद मिश्रा ने भी सुझाव दिया कि स्थिति को अलग तरह से संभाला जा सकता था. मिश्रा ने कहा, 'अगर स्थानीय पुलिस प्रशासन ने समय पर, सही और व्यावहारिक कदम उठाए होते, तो स्थिति को ज्यादा संवेदनशीलता के साथ संभाला जा सकता था.' उन्होंने इसमें शामिल अधिकारियों को सस्पेंड करने का समर्थन किया और निष्पक्ष जांच की मांग की.
विजय कुमार सिन्हा, मिथिलेश तिवारी, ऋतुराज सिन्हा और आनंद मिश्रा के बयान अहम हैं क्योंकि ये सत्ताधारी पार्टी और सरकार के भीतर से आए हैं. जहां पुलिस ने शुरू में एनकाउंटर का बचाव किया था, वहीं अब बीजेपी नेता सवाल उठा रहे हैं कि क्या सही प्रक्रियाओं का पालन किया गया और क्या इस हत्या को रोका जा सकता था.
बीजेपी के भीतर से ही सवाल उठने के कारण, सम्राट सरकार और पुलिस प्रशासन पर शाहपुर में हुई घटना का पूरा ब्योरा देने और किसी भी तरह की चूक पाए जाने पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ रहा है.
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