अयोध्या में श्री राम मंदिर में चढ़ाए गए दान और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच जांच चल रही है. उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बुधवार को ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय और एडमिनिस्ट्रेटर गोपाल राव से पूछताछ की है.
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ का केंद्र दान में मिले पैसों, मंदिर के भीतर की व्यवस्थाओं और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका रही है. SIT ने केवल शीर्ष अधिकारियों से ही नहीं, बल्कि दान की रकम गिनने और ट्रस्ट के रिकॉर्ड संभालने वाले कर्मचारियों से भी विस्तार से जानकारी जुटाई है.
बताया गया कि SIT में शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, इंस्पेक्टर जनरल किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन ने चंपत राय और गोपाल राव से अलग-अलग पूछताछ की है. इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों को पूछताछ प्रक्रिया से दूर रखा गया.
जांच टीम ने सवालों के जरिए यह समझने की कोशिश की कि दान की रकम के संग्रहण, रिकॉर्डिंग और प्रबंधन की प्रक्रिया किस तरह संचालित होती है. SIT ने जांच के दौरान कई अहम रिकॉर्ड भी अपने कब्जे में लिए. CCTV फुटेज की जांच के साथ दान से जुड़ी पूरी प्रक्रिया का अध्ययन किया.
जांच टीम ने दान पेटियों की गिनती की, उनके रखरखाव की प्रक्रिया को देखा और उससे जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया. पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी सुरक्षित किया गया है. SIT प्रमुख विजय विश्वास पंत ने रामलला के गर्भगृह के सामने ग्राउंड फ्लोर पर स्थित कमरे का भी निरीक्षण किया.
यहां श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए गहने और अन्य धातु रखी जाती हैं. इस दौरान ट्रस्ट कर्मचारी कृष्णदेव तिवारी से भी पूछताछ की गई, जो इस व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालते हैं. जांच टीम ने यह जानने की कोशिश की कि बहुमूल्य वस्तुओं की सुरक्षा और रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया क्या है.
बुधवार देर शाम तक SIT के सदस्य राम जन्मभूमि परिसर में मौजूद रहे और अलग-अलग बिंदुओं पर जानकारी जुटाते रहे. अधिकारियों ने जांच टीम को बताया कि दान की रकम गिनने की प्रक्रिया में ट्रस्ट, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और कलेक्शन एजेंसी से जुड़े करीब 40 कर्मचारी शामिल रहते हैं.
ये कर्मचारी दो शिफ्ट में काम करते हैं. दान की राशि की गणना और रिकॉर्डिंग की जिम्मेदारी निभाते हैं. SIT इस पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र की भी समीक्षा कर रही है. इस पूरे मामले में अब तक तीन अलग-अलग लोगों ने शिकायत देकर FIR दर्ज करने की मांग की है.
मंगलवार को धर्म सेना के नेता संतोष दुबे और उत्तर प्रदेश यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी. वहीं करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने सवाल उठाया कि जब आरोप इतने गंभीर हैं तो अब तक FIR क्यों दर्ज नहीं की गई.
ये मामला पहली बार 7 जून को राजनीतिक बहस का विषय बना था. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने दावा किया था कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपए के दान में गड़बड़ी हुई है. अखिलेश यादव ने अदालत से इस मामले का संज्ञान लेने की भी मांग की थी.
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