अंडमान सागर में बड़ा हादसा, रोहिंग्याओं-बांग्लादेशियों से भरी नाव डूबी, 250 लोग लापता

अंडमान सागर में एक बड़ा हादसा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार यहां रोहिंग्या रिफ्यूजी और बांग्लादेशियों से भरी एक नाव डूब गई है. इस हादसे में 250 लोगों के डूबने का अंदेशा है.

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अंडमान सागर में नाव डूबी (File photo: Pexels) अंडमान सागर में नाव डूबी (File photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:01 PM IST

अंडमान सागर में मलेशिया जा रही एक नाव डूब गई है. इसमें अवैध रूप से सफर कर रहे कई लोग सवार थे. इनमें ज्यादातर रोहिंग्या मजदूर और बांग्लादेशी नागरिक थे. इस घटना में कम से कम नौ लोगों को बचा लिया गया है, जबकि 250 से अधिक अन्य लोगों के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. 

बांग्लादेश के अखबार 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के मुताबिक इस नाव में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों सहित लगभग 250-280 लोग सवार थे. बताया जा रहा है कि समुद्र में कई दिन बिताने के बाद यह नाव पलट गई. माना जा रहा है कि इस घटना का पता तब चला जब आसपास पेट्रोलिंग कर रहे जहाजों ने समुद्र से नौ लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया. 

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एक प्रेस रिलीज में बांग्लादेश कोस्ट गार्ड के मीडिया अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर सब्बीर आलम सुजान ने बताया कि बांग्लादेश का झंडा लगा जहाज MT मेघना प्राइड चटगांव से इंडोनेशिया जा रहा था.

बताया जा रहा है कि ये घटना 9 अप्रैल की है. रेस्क्यू के बाद आधी रात के करीब हादसे में बचे लोगों को बांग्लादेश कोस्ट गार्ड के गश्ती जहाज़ 'मंसूर अली' को सौंप दिया गया. 

बांग्लादेश के अखबार दे डेली स्टार के अनुसार इस हादसे में बचे हुए लोगों ने मानव तस्करी और उस जानलेवा सफर के रोंगटे खड़े कर देने वाले किस्से सुनाए. 

रफ़ीकुल इस्लाम नाम का एक रोहिंग्या इस घटना में बच गया. उसने बताया कि 2 अप्रैल को कुतुपालोंग बाज़ार में उसे नौकरी का झांसा देकर फंसाया गया था. उसे टेकनाफ़ के कछोपिया यूनियन के राजारछारा इलाके में एक घर में ले जाया गया, जहां उसे 20 से 25 अन्य लोगों के साथ अमानवीय हालात में कैद करके रखा गया था. 

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इस शख्स ने आरोप लगाया कि जब भी पीड़ित भागने की कोशिश करते थे तो उनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता था. इसने यह भी बताया कि उस इलाके में कई घरों का इस्तेमाल तस्करी करके लाए गए लोगों को कैद करने के लिए किया जाता था. 

रफीकुल के अनुसार बाद में जहाज पर और भी यात्री चढ़ाए गए जिससे कुल संख्या लगभग 280 हो गई. इनमें 13 क्रू सदस्य और तस्कर, 21 रोहिंग्या महिलाएं और चार बच्चे शामिल थे. इन यात्रियों में से लगभग 150 रोहिंग्या थे, जबकि बाकी बांग्लादेशी थे.

4 अप्रैल की रात को उन्हें मरीन ड्राइव के पास राजारछरा से सटे तट पर ले जाया गया और छोटी मछली पकड़ने वाली नावों पर बिठाया गया. एक समय तो उन्हें पास की झाड़ियों में छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि उस समय बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश का एक गश्ती दल वहां से गुजर रहा था.

4 अप्रैल को म्यांमार में शामिला से निकलने के बाद यह जहाज 8 अप्रैल को अंडमान द्वीप समूह के पास पहुंचा.

बाद में उन्हें म्यांमार के जलक्षेत्र के पास सेंट मार्टिन द्वीप के करीब मौजूद एक बड़ी मछली पकड़ने वाली नाव में स्थानांतरित कर दिया गया. 

समुद्र में तेज लहरों और खराब मौसम के कारण तस्करों ने कथित तौर पर यात्रियों को मछली और जाल रखने के लिए बने चार तंग स्टोरेज कंपार्टमेंट में ज़बरदस्ती ठूंस दिया.

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रफीकुल ने दावा किया कि दम घुटने और अत्यधिक भीड़ के कारण 25 से 30 लोगों की मौत हो गई. 

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अगर जहाज के डेक पर मौजूद लोग कंपार्टमेंट में जाने से मना करते तो तस्कर जहाज को डुबो देने की धमकी देते.
रफीकुल ने बताया कि आख़िरकार बड़ी-बड़ी लहरों की चपेट में आने से जहाज पलट गया.

वह दो-लीटर वाली पानी की बोतल को पकड़कर किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहा, लेकिन वह यह नहीं बता सका कि बाकी लोगों के साथ क्या हुआ. 

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