'15-20 साल आगे की सोचो...', राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में अमित शाह का कड़ा संदेश, सुरक्षा एजेंसियों को दिया नया टास्क

राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन के समापन सत्र में अमित शाह ने कहा कि भारत की सुरक्षा नीति को केवल मौजूदा खतरों से निपटने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. आने वाले 15-20 वर्षों के अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय ट्रेंड्स का अध्ययन कर भविष्य की चुनौतियों को पहले पहचानना और बड़ी समस्या बनने से पहले रोकना जरूरी है.

Advertisement
अमित शाह ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौती पर हमारा फोकस है (Photo: PTI) अमित शाह ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौती पर हमारा फोकस है (Photo: PTI)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST

नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन (NSSC) के समापन सत्र में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर भविष्य की रणनीति का खाका सामने रखा. उन्होंने साफ कहा कि सुरक्षा नीति का मकसद केवल मौजूदा चुनौतियों से निपटना नहीं होना चाहिए, बल्कि आने वाले 15 से 20 वर्षों के अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय ट्रेंड्स को देखकर संभावित खतरों की पहले ही पहचान करना और उन्हें बड़ी समस्या बनने से पहले रोकना होना चाहिए.

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है और विकसित भारत की पहली शर्त मजबूत आंतरिक सुरक्षा है. उनका कहना था कि यदि भारत को दुनिया में हर क्षेत्र में अग्रणी बनना है तो देश के भीतर सुरक्षा का वातावरण मजबूत और स्थायी होना जरूरी है.

Advertisement

भविष्य की चुनौती आज ही पहचानने पर जोर

राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में अमित शाह का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि सुरक्षा व्यवस्था को प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्वानुमान आधारित बनाया जाए. उन्होंने कहा कि किसी समस्या के विकराल रूप लेने के बाद उससे लड़ना मुश्किल और महंगा होता है, जबकि उसके शुरुआती संकेतों को पहचानकर कार्रवाई करना ज्यादा प्रभावी होता है.

गृह मंत्री ने कहा कि NSSC का यह मंच आने वाले 15-20 वर्षों के अंतरराष्ट्रीय ट्रेंड्स का अध्ययन करे और यह तय करे कि भविष्य में कौन-कौन सी नई समस्याएं सामने आ सकती हैं. इसके साथ ही उन चुनौतियों को रोकने के लिए अभी से रणनीति तैयार की जाए. उन्होंने कहा कि देश की जिम्मेदारी केवल आज की जीत को स्थायी बनाना नहीं है. सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस बलों को उन खतरों की भी कल्पना करनी होगी, जो आने वाले वर्षों में जन्म ले सकते हैं. यानी सुरक्षा व्यवस्था में “पहले पहचान, फिर कार्रवाई” की सोच को संस्थागत रूप देना होगा.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'कांग्रेस ने वंदे मातरम् के दो टुकड़े किए, राहुल के नेतृत्व में तुष्टीकरण की राजनीति', अमित शाह का वार

नक्सलवाद, नारकोटिक्स और नॉर्थ ईस्ट से सीख

अमित शाह ने कहा कि पहले की सरकारें अगर नारकोटिक्स, नक्सलवाद और नॉर्थ ईस्ट की समस्याओं को उनके शुरुआती दौर में ही विजुअलाइज कर पातीं, तो देश को दशकों तक इन चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ता. उन्होंने दावा किया कि आंतरिक सुरक्षा के इन तीन प्रमुख हॉटस्पॉट में खड़ी चुनौतियों को समाप्त करने में केंद्र, राज्य पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और CAPF ने मिलकर काम किया है.

गृह मंत्री ने इस सफलता का श्रेय सुरक्षा बलों और राज्यों की पुलिस को देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से बड़ी से बड़ी सुरक्षा चुनौती को समाप्त किया जा सकता है. अब चुनौती यह है कि भविष्य में ऐसी कोई नई समस्या उसी तरह जड़ न पकड़ सके. इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों को बदलती परिस्थितियों, तकनीक, अर्थव्यवस्था, वैश्विक राजनीति और सामाजिक बदलावों का लगातार अध्ययन करना होगा.

आतंकवाद के खिलाफ ‘प्रहार’ को रोजमर्रा की रणनीति बनाने का आह्वान

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को लेकर अमित शाह ने ‘प्रहार’ को दस्तावेज से निकालकर रोजमर्रा की पुलिसिंग और सुरक्षा कार्रवाई का हिस्सा बनाने की बात कही. उन्होंने 360 डिग्री दृष्टिकोण के जरिए आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करने का आह्वान किया.

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ रणनीति केवल आतंकियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को निशाना बनाना होगा. इसमें फंडिंग, लॉजिस्टिक्स, हथियार, भर्ती, डिजिटल नेटवर्क, स्लीपर मॉड्यूल और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन जैसे सभी पहलुओं को शामिल करना होगा.

अमित शाह ने कहा कि ‘प्रहार’ की सोच कम से कम DYSP स्तर तक आत्मसात होनी चाहिए और सभी DGP अपने-अपने राज्यों में इसके लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करें. उन्होंने BNS में आतंकवाद की स्पष्ट परिभाषा और ट्रायल इन एब्सेंशिया जैसे प्रावधानों के प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया.

Advertisement

ड्रग्स के खिलाफ तीन D - डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय

नारकोटिक्स को लेकर भी गृह मंत्री ने भविष्य की रणनीति स्पष्ट की. उन्होंने नशीले पदार्थों पर नियंत्रण संबंधी विज़न दस्तावे 2026-2029 को सभी राज्यों की पुलिस द्वारा जमीन पर लागू करने की अपील की. नशे के खिलाफ अभियान को उन्होंने तीन D - डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय पर आधारित बताया.

पहला लक्ष्य होगा ड्रग नेटवर्क और उसकी गतिविधियों का समय रहते पता लगाना. दूसरा लक्ष्य होगा उसके पूरे नेटवर्क, वित्तीय चैनल और सप्लाई सिस्टम को बाधित करना. तीसरा लक्ष्य होगा पूरे नेटवर्क को नष्ट करना. अमित शाह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या किसी एक एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं है. केंद्र और राज्य सरकारों के सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा. इसका अंतिम उद्देश्य देश की नई पीढ़ी को नशे के खतरे से सुरक्षित रखना है.

घुसपैठ पर सख्त रणनीति

सीमा सुरक्षा को लेकर अमित शाह ने कहा कि पिछले आठ महीनों में उन्होंने सभी भूमि-सीमा वाले राज्यों का दौरा किया और एक चतुष्कोणीय सीमा सुरक्षा दृष्टिकोण का दस्तावेज राज्यों के साथ साझा किया है. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य बहुत कम समय में देश को घुसपैठियों से मुक्त करना है. इसके लिए राज्यों में वरिष्ठ स्तर के नोडल अधिकारियों की नियुक्ति पर भी जोर दिया गया.

अमित शाह ने कहा कि घुसपैठ केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है. इसके तीन बड़े प्रभाव हैं - राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थतंत्र और जनसांख्यिकी में बदलाव. इसलिए घुसपैठ विरोधी अभियान आने वाले समय में आंतरिक सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता रहेगा.

Advertisement

विदेश में छिपे भगोड़ों को भारत लाने पर जोर

गृह मंत्री ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ भी सख्त रणनीति की बात कही. उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से 2026 के बीच लगभग 274 भगोड़ों को विदेश से भारत लाया गया है. भारतपोल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग, दस्तावेजीकरण, अनुवाद, कानूनी औपचारिकताओं और अधिकारियों की ट्रेनिंग को मजबूत किया गया है.

अमित शाह ने राज्यों से लक्ष्य तय करने को कहा कि विदेश में बैठा कोई भी भगोड़ा लंबे समय तक भारतीय कानून की पहुंच से बाहर न रहे. इसके लिए हर राज्य की पुलिस में एक प्रभावी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया.

तकनीक बनेगी भविष्य की सुरक्षा की रीढ़

राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में तकनीक और डेटा का मुद्दा भी प्रमुख रहा. अमित शाह ने बताया कि मल्टी-एजेंसी सेंटर यानी MAC को अपग्रेड कर ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है, जो विभिन्न आयामों से परिणाम देने में सक्षम हो.

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में MAC का तकनीकी अपग्रेडेशन चार गुना किया जाएगा. CCTNS, ICJS, NATGRID और NAFIS जैसे प्लेटफॉर्मों के डेटा को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में काम किया गया है. इसका उद्देश्य यह है कि अलग-अलग एजेंसियों के पास मौजूद जानकारी एक-दूसरे से संवाद कर सके और उससे कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी तैयार हो.

गृह मंत्री ने युवा अधिकारियों से AI का इस्तेमाल डेटा इंटीग्रेशन, एनालिसिस और अपराध के काम करने का ढंग की पहचान के लिए करने का आह्वान किया. यानी आने वाले समय में सुरक्षा व्यवस्था में केवल मानव खुफिया तंत्र ही नहीं, बल्कि डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इंटेलिजेंस भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

Advertisement

यह भी पढ़ें: चिकन नेक की किलेबंदी, अमित शाह ने सुरक्षा बलों संग बनाई सिलीगुड़ी कॉरिडोर की नई रणनीति

साइबर-मिसइन्फॉर्मेशन से लेकर ऊर्जा सुरक्षा तक नई चुनौती

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि भारत की सुरक्षा रणनीति सिर्फ देश की सीमाओं या पारंपरिक आतंकवाद को ध्यान में रखकर नहीं बनाई जा सकती. उन्होंने वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा संसाधनों की असुरक्षा, सप्लाई चेन में बाधा, बढ़ते कट्टरपंथ और साइबर-मिसइन्फॉर्मेशन वॉर को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का हिस्सा बताया.

इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में सुरक्षा का अर्थ केवल सीमा पर सैनिकों की तैनाती या आतंकवाद से मुकाबला नहीं रहेगा. आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल सुरक्षा, सूचना सुरक्षा और सप्लाई चेन की सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा होगी.

सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए गलत सूचना, भ्रामक नैरेटिव और साइबर हमले किसी देश की सामाजिक स्थिरता और संस्थानों पर असर डाल सकते हैं. इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को इन क्षेत्रों में भी पहले से तैयारी करनी होगी.

न्याय व्यवस्था में तकनीक और फॉरेंसिक पर जोर

गृह मंत्री ने आपराधिक न्याय व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि तीन नई न्याय संहिताओं के साथ फॉरेंसिक साइंस का नेटवर्क मजबूत किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के माध्यम से हर साल हजारों युवा इस क्षेत्र में प्रशिक्षित होकर निकल रहे हैं.

Advertisement

सरकार का लक्ष्य तीनों नई न्याय संहिताओं के पूर्ण क्रियान्वयन के साथ आपराधिक मामलों के निपटारे में तेजी लाना और दोषसिद्धि दर को बढ़ाना है. इससे साफ है कि भविष्य की आंतरिक सुरक्षा रणनीति में पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ फॉरेंसिक, डिजिटल एविडेंस, डेटा और तेज न्याय प्रक्रिया को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है.

समुद्री सीमा भी सुरक्षा रणनीति के केंद्र में

अमित शाह ने इंटेलिजेंस ब्यूरो को अगले सम्मेलन से पहले समुद्री सीमा से जुड़े सभी जिलों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया. उन्होंने इसके लिए एजेंडा और समयबद्ध रोडमैप पहले से तैयार करने की बात कही. यह संकेत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की लंबी समुद्री सीमा के सामने पारंपरिक तस्करी से लेकर ड्रग्स, अवैध घुसपैठ, हथियारों की आवाजाही और समुद्री रास्तों के इस्तेमाल जैसी चुनौतियां मौजूद हैं. इसलिए भविष्य की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में जमीन और हवाई सीमा के साथ समुद्री सुरक्षा को भी बराबर प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया गया.

केंद्र-राज्य समन्वय को बताया सफलता की कुंजी

अमित शाह के पूरे संबोधन में एक बात लगातार दिखाई दी - केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत समन्वय. आतंकवाद हो, नारकोटिक्स हो, घुसपैठ हो, भगोड़े अपराधी हों या साइबर अपराध - इनमें से किसी भी चुनौती से अकेली एजेंसी या अकेली सरकार प्रभावी ढंग से नहीं लड़ सकती. गृह मंत्री ने PFI पर कार्रवाई को केंद्र-राज्य समन्वय का उदाहरण बताया. उनका संदेश स्पष्ट था कि इंटेलिजेंस शेयरिंग, संयुक्त ऑपरेशन, डेटा इंटीग्रेशन और एक साझा रणनीति के जरिए ही राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर स्थायी सफलता हासिल की जा सकती है.

Advertisement

2047 के विकसित भारत के लिए सुरक्षा का नया मॉडल

राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन से निकला सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारत अब केवल मौजूदा सुरक्षा समस्याओं का जवाब देने वाली व्यवस्था नहीं चाहता. लक्ष्य ऐसी सुरक्षा प्रणाली तैयार करना है जो भविष्य के खतरे को उसके जन्म से पहले पहचान सके. अमित शाह ने इसी सोच को सामने रखते हुए कहा कि चुनौतियों को समय से पहले पहचानना होगा और बड़ी समस्या बनने से पहले उन्हें खत्म करना होगा.

2047 के विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा भी लगातार व्यापक होगा. आतंकवाद और नक्सलवाद जैसे पारंपरिक खतरों के साथ साइबर युद्ध, AI आधारित अपराध, मिसइन्फॉर्मेशन, ड्रग नेटवर्क, वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा संकट, सप्लाई चेन और जनसांख्यिकीय दबाव जैसी नई चुनौतियां सुरक्षा एजेंसियों के सामने होंगी.

यह भी पढ़ें: ‘दशकों तक वंदे मातरम् की अनदेखी हुई...’, SSB के कार्यक्रम में बोले अमित शाह

ऐसे में NSSC जैसे मंच की भूमिका केवल सालाना समीक्षा तक सीमित नहीं रह सकती. इसे भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए थिंक टैंक, अर्ली वार्निंग सिस्टम और रणनीति निर्माण के प्रमुख मंच के रूप में विकसित करना होगा.

अमित शाह का संदेश मूलतः यही था कि भारत को ऐसी सुरक्षा व्यवस्था बनानी है जिसमें खतरा आने का इंतजार न किया जाए, बल्कि उसके संकेतों को पहले पढ़ा जाए, उसके स्रोत को पहचाना जाए और समस्या के विकराल रूप लेने से पहले ही उसे रोक दिया जाए. यही रणनीति भारत को सुरक्षित, मजबूत और 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे ले जाने की आधारशिला बन सकती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »