महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में विजयादशमी के मौके पर एक ऐसा प्रदर्शन हुआ, जिसने पुरुषों के अधिकारों और न्याय की मांग को चर्चा में ला दिया. यहां पत्नी पीड़ित पुरुष आश्रम की ओर से शूर्पणखा का दहन किया गया. संगठन ने इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए सरकार से पुरुष आयोग बनाने की मांग उठाई. आश्रम का कहना है कि जिस तरह महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के लिए आयोग और न्यायिक व्यवस्था मौजूद है, उसी तरह पुरुषों की समस्याएं सुनने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए भी एक स्वतंत्र आयोग होना चाहिए.
वालुज स्थित पत्नी पीड़ित पुरुष आश्रम पिछले 15 वर्षों से पुरुषों के अधिकारों के लिए काम कर रहा है. संगठन के अध्यक्ष भारत फुलारे के मुताबिक, पिछले दस वर्षों से हर विजयादशमी पर शूर्पणखा दहन के जरिए पुरुष आयोग की मांग उठाई जा रही है. संगठन इस आयोजन को अपने आंदोलन का प्रतीक मानता है.
भारत फुलारे का कहना है कि दशहरे पर रावण दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. इसी तरह संगठन महिलाओं में मौजूद बुरी प्रवृत्तियों के विरोध में शूर्पणखा दहन के जरिए अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहता है. आश्रम का दावा है कि यह प्रदर्शन पुरुषों के साथ होने वाले कथित अन्याय की ओर ध्यान दिलाने के लिए किया जाता है.
पुरुषों के लिए भी हो स्वतंत्र आयोग
पुरुष आयोग की जरूरत पर जोर देते हुए भारत फुलारे ने आरोप लगाया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कुछ कानूनों का कथित तौर पर दुरुपयोग किया जाता है. उनके मुताबिक, इससे पुरुषों के साथ-साथ उनके परिवारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. फुलारे का कहना है कि हर मामले में महिला ही सही हो, यह जरूरी नहीं है. कुछ मामलों में पुरुष भी अन्याय का सामना कर सकते हैं. ऐसे में उनकी शिकायतों को सुनना, उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें भी न्याय का अवसर देना जरूरी है. संगठन की मांग है कि पुरुषों की शिकायतों और समस्याओं पर सुनवाई के लिए स्वतंत्र पुरुष आयोग बनाया जाए. आश्रम का मानना है कि इस तरह पुरुषों को भी अपनी बात रखने और न्याय पाने के लिए एक अलग मंच मिल सकेगा.
आयोग बनने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
पत्नी पीड़ित पुरुष आश्रम ने साफ किया है कि पुरुष आयोग की स्थापना होने तक उसका संघर्ष जारी रहेगा. संगठन अध्यक्ष भारत फुलारे के मुताबिक, पिछले दस वर्षों से शूर्पणखा दहन के जरिए उठाई जा रही यह मांग आगे भी जारी रहेगी. विजयादशमी पर किया गया यह प्रदर्शन पुरुषों के अधिकारों और उनके लिए अलग आयोग बनाने की मांग को सामने लाने का संगठन का एक और प्रयास था.
इसरारउद्दीन चिश्ती