बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को मुंबई की पूर्व मेयर और शिवसेना (UBT) की कॉर्पोरेटर विशाखा राउत की उस याचिका खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने (विशाखा राउत) अपने अमान्य किए गए जाति प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) को लेकर मुंबई नगर प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती दी थी.
दरअसल, पालघर जिला जाति सत्यापन समिति ने गलत क्षेत्राधिकार के आधार पर साल 2005 में जारी उनके ओबीसी प्रमाण पत्र को अमान्य ठहरा दिया था. जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के कारण बीएमसी आयुक्त के समक्ष रिपोर्ट पेश होने और नगर निगम चुनाव विभाग द्वारा आदेश जारी करने के बाद सिविक हाउस में उनके पद को रद्द करने की घोषणा की जाएगी, जिससे उन्हें कॉरपोरेटर पद से अयोग्य घोषित किया जाएगा.
विशाखा राउत ने जाति पड़ताल समिति के इस फैसले के खिलाफ कोंकण संभागीय आयुक्त के समक्ष अपील दायर की है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें वहां इस मामले की जल्द सुनवाई की मांग करने की अनुमति दे दी है. वहीं, राउत ने आरोप लगाया है कि जाति पड़ताल समिति सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के दबाव में काम कर रही थी.
विशाखा राउत मुंबई के हाई-प्रोफाइल शिवाजी पार्क क्षेत्र वाले वार्ड 191 का प्रतिनिधित्व करती हैं. ये वार्ड ओबीसी महिला के लिए आरक्षित था. इस चुनाव में उन्होंने शिंदे गुट की शिवसेना प्रत्याशी और पूर्व विधायक सदा सरवणकर की बेटी प्रिया सरवणकर को 167 मतों के अंतर से हराया था.
विद्या