मुंबई में शहीदों को सलाम: उत्तर भारतीय संघ ने 4 शहीद सैनिकों के परिवारों को किया सम्मानित, दिए ₹1-1 लाख

मुंबई में उत्तर भारतीय संघ ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर चार शहीद सैनिकों के परिवारों को सम्मानित किया और हर परिवार को एक-एक लाख रुपये दिए. सम्मानित होने वालों में नायक सुनील नखाते, लांस नायक रत्नाकर कलांबे, नायक माणिक दमदमे और सिपाही एकनाथ माने शामिल थे, जो अलग-अलग सैन्य अभियानों में शहीद हुए थे.

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80वें स्वतंत्रता दिवस पर चार शहीद सैनिकों के परिवारों को सम्मानित किया गया (Photo: ITG) 80वें स्वतंत्रता दिवस पर चार शहीद सैनिकों के परिवारों को सम्मानित किया गया (Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 16 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:53 PM IST

80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुंबई में उत्तर भारतीय संघ ने चार शहीद सैनिकों के परिवारों को सम्मानित करते हुए हर परिवार को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी. जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, उसी दिन संगठन ने उन जवानों की कुर्बानी को याद किया जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपनी जान दे दी. समारोह में नायक सुनील काशीराम नखाते, लांस नायक रत्नाकर रामजी कलांबे, नायक माणिक भीमराव दमदमे और सिपाही एकनाथ भीकू माने के परिवारों को सम्मानित किया गया.

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नायक सुनील काशीराम नखाते 16 सितंबर 2004 को श्रीनगर के कुपवाड़ा में ऑपरेशन रक्षक के दौरान शहीद हुए थे. 7 मराठा लाइट इन्फैंट्री के लांस नायक रत्नाकर रामजी कलांबे 5 मार्च 2001 को जम्मू-कश्मीर के डोडा सेक्टर में इसी ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए. 12 मराठा लाइट इन्फैंट्री के नायक माणिक भीमराव दमदमे 4 मई 2001 को पुंछ जिले के तिंबरा गांव में शहीद हुए थे.

उन्होंने ऊंचाई वाले मुश्किल इलाकों में लंबे समय तक सेवा दी थी और उन्हें हाई एल्टीट्यूड मेडल समेत कई सम्मान मिल चुके थे. उनकी आखिरी तैनाती 17 राष्ट्रीय राइफल्स में थी. सिपाही एकनाथ भीकू माने 1982 में नागालैंड में हुए एक घात हमले में शहीद हुए थे.

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समारोह में उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष संतोष आर.एन. सिंह ने कहा कि यह पहल किसी मुआवजे के तौर पर नहीं बल्कि शहीदों के प्रति सम्मान जताने के लिए की गई है. उन्होंने कहा कि कोई भी आर्थिक मदद किसी परिवार के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन नागरिक होने के नाते यह जिम्मेदारी बनती है कि शहीदों के बलिदान को याद रखा जाए और उनके परिवारों के साथ खड़ा रहा जाए.

संगठन के मुताबिक यह पहल उसके सामाजिक कामों का हिस्सा है, जिसमें जरूरतमंद परिवारों की मदद करना और समाज में योगदान देने वालों को सम्मानित करना शामिल है. शहीदों के परिवारों के लिए यह मौका इस बात की याद भी बना कि सालों बाद भी अपने प्रियजनों का बलिदान देश की यादों में जिंदा रहता है.

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