महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा समिति गठित किए जाने और आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनावर के छुट्टी पर जाने के बाद अभ्यर्थियों ने रविवार देर रात अपना 10 दिवसीय आंदोलन समाप्त कर दिया.
पुणे के एसएम जोशी ब्रिज पर पिछले दस दिनों से जारी इस प्रदर्शन को समाप्त कराने के लिए मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले के नेतृत्व में राज्य सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल देर रात अभ्यर्थियों से मिलने पहुंचा. प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे को सचिव बनाते हुए पूर्व जज दिलीप भोसले की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन कर दिया गया है.
हालांकि, प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी MPSC चेयरमैन विवेक भीमनावर को पद से हटाने की मांग पर अड़े रहे. इस दौरान एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने प्रस्ताव रखा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक भीमनावर को कामकाज से दूर रखा जाए. मंत्री भोसले ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से फोन पर चर्चा कर सरकार की सहमति की जानकारी दी, जिसके बाद MPSC अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि विवेकानंद पाटिल ने आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया.
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नैतिकता के आधार पर लीव पर जा रहा हूं: MPSC चेयरमैन
आंदोलन समाप्त होने के तुरंत बाद MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनावर ने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट कर अपनी छुट्टी पर जाने की घोषणा की. उन्होंने लिखा, "राज्य सरकार ने MPSC पेपर लीक मामले में न्यायिक जांच का ऐलान किया है. जीवन भर मैंने नैतिकता को प्राथमिकता दी है. इसलिए जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती, मैंने पद पर बने रहने के बजाय इस अवधि के दौरान छुट्टी पर जाने का फैसला किया है."
समिति और अन्य आश्वासनों पर बनी सहमति
पूर्व जज दिलीप भोसले की अध्यक्षता वाली इस जांच समिति में आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल, सेवानिवृत्त जज पी.डी. नाईक और आईएएस तुकाराम मुंढे (सचिव) शामिल हैं. इसके अलावा सरकार ने अभ्यर्थियों की अन्य प्रमुख मांगों को स्वीकार करने का आश्वासन दिया है:
फिलहाल आंदोलन समाप्त हो गया है, लेकिन अभ्यर्थियों की निगाहें जांच समिति की कार्रवाई, भर्ती सुधारों और सरकार के अगले कदमों पर रहेंगी.
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