महाराष्ट्र के वाशिम जिला सत्र न्यायालय ने पुलिस कस्टडी में हुई हत्या के मामले में एक पूर्व थानेदार समेत 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा दी है. अपने निर्दोष जवान बेटे को खोने वाले बुजुर्ग माता-पिता को पूरे 15 साल बाद आखिरकार न्याय मिल गया है.
दरअसल 10 मई को रिसोड़ पुलिस ने रात के 3 बजे पारधी समाज के 23 साल के युवक बेग्या पवार को उसके घर से पकड़ा था. पुलिस ने बताया था कि वो बस बेग्या को पूछताछ के लिए ले जा रही है. लेकिन पुलिस स्टेशन ले जाकर उसकी इस कदर बेरहमी से पिटाई की गई कि उसकी मौत हो गई.
मृतक की मेडिकल जांच में पता चला कि बेरहमी से पिटाई की वजह से उसके शरीर की कई हड्डियां टूट गई थीं. एक साल पहले ही शादी करने वाले बेग्या पवार पर पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं था. इसके बावजूद उसे थाने ले जाया गया और जमकर पीटा भी गया.
थानेदार ने शिकायत दर्ज करने से किया था इनकार
बेटे की मौत के बाद जब बुजुर्ग माता-पिता रिसोड़ पुलिस स्टेशन में शिकायत करने पहुंचे, तो वहां के तत्कालीन थानेदार ने केस दर्ज करने से साफ मना कर दिया. दरअसल, उस शिकायत में खुद थानेदार का ही नाम शामिल था. इसके बाद केस दर्ज कराने के लिए इलाके में बड़े पैमाने पर मोर्चे और प्रदर्शन भी निकाले गए.
सीआईडी की जांच से खुला राज
बाद में इसकी जांच CID के अधिकारी अनवर शेख को सौंपी गई. अनवर शेख ने मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच की और अदालत में मजबूत चार्जशीट पेश की. इस चार्जशीट में पुलिस के जुल्म का पूरा सच सामने आ गया.
15 साल बाद दोषियों को सजा
15 सालों की लंबी मशक्कत के बाद आखिरकार वाशिम जिला सत्र न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए तत्कालीन थानेदार महादेव माणिक धांडे और उनके 8 पुलिस कर्मचारियों को उम्रकैद की सजा सुना दी. इन 9 दोषियों में से तत्कालीन थानेदार समेत दो कर्मचारी अब पुलिस सेवा से रिटायर भी हो चुके हैं.
बेटे के हत्यारों को सजा मिलने पर बुजुर्ग माता-पिता ने देश की न्याय व्यवस्था और सीआईडी अधिकारी अनवर शेख का दिल से आभार जताया है. उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद अब उन्हें सुकून की नींद आएगी.
ज़का खान