मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर पीछे से ट्रक में घुसी कार, 1 KM तक घिसटती रही, मृत दंपती के परिवार को ₹1.80 करोड़ मुआवजा

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 2018 में हुए हादसे में जान गंवाने वाले दंपति के परिवार को MACT ने ₹1.80 करोड़ मुआवजा देने का आदेश दिया. ट्रिब्यूनल ने कार चालक को 70% और ट्रक चालक को 30% जिम्मेदार माना.

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MACT ने तय की दोनों चालकों की गलती. (सांकेतिक तस्वीर) MACT ने तय की दोनों चालकों की गलती. (सांकेतिक तस्वीर)

aajtak.in

  • मुंबई-पुणे,
  • 31 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:47 PM IST

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर साल 2018 में हुए एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले दंपति के परिजनों को मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. ट्रिब्यूनल ने हादसे के लिए कार चालक को 70 प्रतिशत और ट्रक चालक को 30 प्रतिशत जिम्मेदार माना है.

29 अक्टूबर को दिए गए आदेश में MACT की सदस्य गौरी कवडिकर ने कहा कि आगे चल रहे वाहनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना चालक की जिम्मेदारी है. हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि ट्रक चालक की तेज और लापरवाह ड्राइविंग भी हादसे की एक वजह थी.

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अचानक ब्रेक लगाने से ट्रक से टकराई थी कार

यह हादसा 23 दिसंबर 2018 को हुआ था. अंकित भूपिंदरसिंह चुघ अपनी वैगनआर कार चला रहे थे. कार में उनकी पत्नी संजना और दो नाबालिग बच्चे भी सवार थे. इसी दौरान कार आगे चल रहे एक ट्रक से पीछे से टकरा गई. आरोप था कि ट्रक चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिए थे.

टक्कर के बाद कार एक किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी तक घिसटती चली गई. हादसे में अंकित और संजना गंभीर रूप से घायल हो गए. बाद में पनवेल के एक ग्रामीण अस्पताल में दोनों की मौत हो गई.

कार चालक को 70 प्रतिशत जिम्मेदार माना

MACT ने अपने आदेश में कहा कि आगे चल रहे वाहन के अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति में हर बार पीछे चल रहे वाहन के चालक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. लेकिन अगर कार चालक ने पर्याप्त दूरी बनाए रखी होती और गति नियंत्रण में रखी होती, तो वह समय रहते ब्रेक लगाकर टक्कर से बच सकता था.

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इसी आधार पर ट्रिब्यूनल ने कार चालक अंकित चुघ को हादसे के लिए 70 प्रतिशत जिम्मेदार माना. वहीं, ट्रक चालक की तेज और लापरवाह ड्राइविंग को 30 प्रतिशत जिम्मेदारी के लिए उत्तरदायी ठहराया.

बीमा कंपनी पहले देगी मुआवजा, बाद में वसूली का अधिकार

मामले में बीमा कंपनी ने दलील दी थी कि ट्रक का परमिट केवल राजस्थान और गुजरात के लिए वैध था. महाराष्ट्र में वाहन चलाने के लिए परमिट का विस्तार नहीं लिया गया था.

इस पर MACT ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी पहले पीड़ित परिवार को मुआवजे की रकम देगी. इसके बाद वह ट्रक मालिक से यह राशि वसूल सकती है.

दोनों की आय के आधार पर तय हुआ मुआवजा

ट्रिब्यूनल ने दंपति की आय और अन्य तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कुल 1,80,99,232 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया.

इसमें संजना चुघ की मौत के लिए 92,53,500 रुपये और अंकित चुघ की मौत के लिए 88,45,732 रुपये शामिल हैं.

संजना सैमसिध माउंट लिट्रा ज़ी स्कूल में काम करती थीं, जबकि अंकित चुघ डेल इंटरनेशनल सर्विसेज में सीनियर डिलीवरी स्पेशलिस्ट के पद पर कार्यरत थे.

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