ग्राउंड रिपोर्ट: रांची में जंतर-मंतर जैसा प्रोटेस्ट! तंबू-बिस्तर लेकर डटे JPSC- JSSCअभ्यर्थी

रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में JPSC और JSSC में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन सत्याग्रह जारी है. छात्र-छात्राओं ने टेंट, बिस्तर और भोजन की व्यवस्था के साथ आंदोलन तेज कर दिया है.

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रांची में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी है . (Photo- ITG) रांची में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी है . (Photo- ITG)

सत्यजीत कुमार

  • रांची,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:09 PM IST

रांची में लगातार दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर छात्र आंदोलन बीते कई दिनों से जारी है. छात्र यह अनिश्चितकालीन सत्याग्रह JPSC और JSSC में हो रहे  भ्रष्टाचार के खिलाफ कर रहे हैं. आंदोलन स्थल पर टेंट बन चुका है, बिस्तर लग चुके हैं ताकि आर-पार की लड़ाई लड़ी जा सके. टेंट में सबसे आगे भगत सिंह, बिरसा मुंडा और बाबा साहेब की तस्वीरें लगी हैं, जबकि मंच पर संविधान का मूल भाव लिखा हुआ है. मंच पर कई जगह तिरंगा भी आन, बान और शान के साथ लगाया गया है.

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मंच पर कुछ प्रदर्शनकारी बैठकर आपस में बातचीत कर रहे थे. सुबह टेंट के बाहर जाकर फ्रेश होने के बाद कई छात्र और छात्राएं पूरे जोश के साथ धरना स्थल पर पहुंच चुके थे. टेंट के अंदर बिजली और पंखों की व्यवस्था कर ली गई थी. एक बड़ा मंच बनाया गया है, जबकि मंच के नीचे भी प्लाई लगाकर एक प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जहां बैठने और सोने की व्यवस्था प्रदर्शनकारियों के लिए की गई है। इसके अलावा बड़ा वाटरप्रूफ पंडाल भी लगाया गया है.

ये छात्र अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर हैं और JPSC तथा JSSC द्वारा आयोजित परीक्षाओं में फैली गहरी भ्रष्टाचार व्यवस्था के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्र नारे तो लगा ही रहे हैं, लेकिन अपने प्रदर्शन की शुरुआत यहां उपस्थित सभी छात्रों ने राष्ट्रगान गाकर की. एक सुर में राष्ट्रगान गाया गया और उसके बाद सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी हुई. कुछ छात्रों ने मशहूर कवियों की रचनाएं सुनाकर भी एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया.

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छात्रों ने कहा अब दूसरा विकल्प नहीं बचा

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि अब उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है.  सीट चाहे JPSC की हो या फिर JSSC की, स्थापना काल से ही उनका आरोप है कि सीटें बेची जा रही हैं. उनका कहना है कि सिस्टम से लड़कर सिस्टम में बदलाव लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. छात्रों का साफ कहना है कि वैसे भी सरकारी नौकरी उनके लिए दूर की कौड़ी बन गई है, क्योंकि हर परीक्षा के बाद विवाद होता है. इसका परिणाम यह होता है कि रांची, हजारीबाग या रामगढ़ में रहकर वर्षों से तैयारी कर रहे मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के हाथ केवल निराशा लगती है. उनका कहना है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन ने उनके मनोबल को बढ़ाया है और उन्हें विश्वास है कि अब उनके सामने भी सरकार झुकेगी.

जंतर-मंतर के प्रदर्शन के बाद रांची में आंदोलन में शामिल छात्राओं का कहना है कि धरना स्थल पर आने के लिए लड़की होने के बावजूद उनके माता-पिता ने उन्हें नहीं रोका. उनका कहना है कि यह आम छात्रों के भविष्य और अस्तित्व की लड़ाई है, यह बातें संवाददाता से पलामू से आई एक छात्रा ने कहीं.

प्रदर्शन में शामिल होने के लिए परिवारवालों ने किया सहयोग

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हजारीबाग और रामगढ़ से आए छात्रों ने भी बताया कि उनके परिजनों ने आर्थिक सहयोग देकर उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने के लिए भेजा है. बातचीत के दौरान एक समाजसेवी दो बोरियों में भरकर मुरमुरे, ब्रेड, बिस्किट और नाश्ते के लिए अन्य स्नैक्स लेकर पहुंचे और उन्होंने स्वेच्छा से इन्हें छात्रों में वितरित किया. इसी तरह लगातार समाज के विभिन्न वर्गों से सत्याग्रह पर बैठे छात्रों को सहयोग मिल रहा है.

किसी छात्र के पिता किसान हैं तो किसी के परिवार में मां नहीं है. ऐसे परिवारों को अपने हालात बदलने के लिए सिर्फ बच्चों की सरकारी नौकरी का इंतजार है. हालांकि, लगातार विवादों के कारण अब वह नौकरी भी उन्हें किसी सपने जैसी लगने लगी है. छात्रों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि अब तक सरकार की ओर से उनसे बात करने तक कोई नहीं आया है. यहां अलग-अलग जिलों से आए लड़के और लड़कियां अपने और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की चिंता को लेकर डटे हुए हैं.

लोग सहयोग कर रहे हैं

छात्रों का कहना है कि टेंट, तंबू और खाने-पीने की व्यवस्था के लिए समाज के अलग-अलग वर्गों से लोग आगे आकर सहयोग कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह आंदोलन अब जोर पकड़ता जा रहा है. दिल्ली के जंतर-मंतर की तरह ही रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में अभ्यर्थी टेंट-तंबू लगाकर, बोरिया-बिस्तर के साथ JPSC और JSSC में भ्रष्टाचार के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन पर उतर चुके हैं.

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जयपाल सिंह स्टेडियम में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो चुके अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश है. यहां बाकायदा बिस्तर और व्यवस्थित पंडाल लगाया गया है. खाने के लिए बर्तन और डोंगे भी पहुंच चुके हैं. यानी साफ है कि आंदोलन और अनिश्चितकालीन सत्याग्रह अब लंबा चलेगा.

आर-पार की लड़ाई लड़कर ही वापस जाएंगे

यहां दूर-दूर के जिलों से छात्र पहुंचे हैं और उनके चेहरों से साफ झलकता है कि वे आर-पार की लड़ाई लड़कर ही वापस जाएंगे. कोई रामगढ़ से आया है, कोई बोकारो से और कोई हजारीबाग से. उन्हें इस बात की बिल्कुल चिंता नहीं है कि भोजन कैसे मिलेगा या दैनिक दिनचर्या कैसे चलेगी. कोई अपने भाई से अनुमति लेकर और रहने के लिए पैसे लेकर यहां पहुंचा है तो कोई अपने पिता से मदद लेकर आया है. आंदोलन में शामिल लड़कियों की संख्या भी अच्छी है। सबके सुर एक हैं. उन्होंने कमर कस ली है कि इस बार JPSC और JSSC को भ्रष्टाचार मुक्त करके ही जाएंगे.

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