'अफजल गुरु के लिए रात में कोर्ट खुली, कुत्तों पर भी सुनवाई, हमें भी कुत्ता बनना पड़ेगा.' JPSC छात्रों की SC से गुहार

जेपीएससी परीक्षा विवाद को लेकर रांची में छात्रों का अनिश्चितकालीन अनशन जारी है. दो बार इंटरव्यू दे चुके और प्रीलिम्स पास छात्र ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है.

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सुप्रीम कोर्ट करे हस्तक्षेप, जेपीएससी छात्र ने की मांग. (photo: ITG) सुप्रीम कोर्ट करे हस्तक्षेप, जेपीएससी छात्र ने की मांग. (photo: ITG)

aajtak.in

  • रांची,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:41 PM IST

रांची में जेपीएससी (JPSC) परीक्षा विवाद को लेकर आक्रोशित छात्र अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं. ग्यारहवीं से तेरहवीं जेपीएससी परीक्षा के मामले में एक साल से तारीख पर तारीख मिलने से परेशान छात्रों ने न्याय की गुहार लगाई है. दो बार इंटरव्यू दे चुके और प्रीलिम्स पास कर चुके एक छात्र ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है. छात्र ने कहा कि संवैधानिक संस्था की स्थिति पर अदालत की खामोशी उन्हें चुभ रही है. वहीं, सरकार से प्रतिनिधिमंडल बातचीत करने पहुंचा है.

एक छात्र ने प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर सवाल करते हुए कहा कि मेरा माननीय अदालत से निवेदन है कि आप महामहीम भीष्म और गुरु द्रोण की तरह मूकदर्शक बनना छोड़ दीजिए. एक संवैधानिक संस्था का चीरहरण हो गया है और आपकी खामोशी हमें चुभ रही है, आप अफजल गुरु के लिए रात में तीन बजे सुप्रीम कोर्ट खोल सकते हैं.

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'छात्रों के भविष्य के लिए हस्तेक्षप करें'

छात्र ने सवाल करते हुए कहा कि कुत्तों के लिए भी सुप्रीम कोर्ट खुल जाता है तो क्या हमें कुत्ता बनना पड़ेगा? इसीलिए आपसे निवेदन है, छात्रों के भविष्य के लिए भी हस्तक्षेप करें. Suo Motu सिर्फ कुत्तों के लिए तो है नहीं, हमारे लिए भी रखिए. हम भी यहां के बच्चे हैं. 

'सुनवाई न होना छात्रों की गलती नहीं'

छात्र ने कहा कि ग्यारहवीं से तेरहवीं जेपीएससी मामले में एक साल से तारीख ही नहीं मिल रही है. छात्र ने मांग की कि अदालत तारीख देकर तीन महीने में सुनवाई पूरी करे, अगर छात्र गलत साबित होते हैं तो उन्हें हटा दिया जाए, लेकिन सुनवाई न होना उनकी गलती नहीं है.

उन्होंने बताया कि प्रदर्शन स्थल पर चार छात्र अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हुए हैं. छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह से गैर-राजनीतिक है. वो किसी भी नेता या मंत्री का नैतिक समर्थन तो लेंगे, लेकिन मंच केवल उन्हीं पीड़ित छात्रों को देंगे, जिन्होंने वास्तव में मेन्स और इंटरव्यू दिया है.

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