गांव छोड़ब नाही,
जंगल छोड़ब नाही,
माई माटी छोड़ब नाहीं,
लड़ाई छोड़ब नाहीं...
झारखंड के आंदोलनकारियों का एंथम रहा यह गीत आज रांची में फिर गूंज रहा है. यूं तो ये गीत लंबे समय से झारखंड में अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय और शोषण के खिलाफ विद्रोह के प्रतीक पर गाया जाता था. लेकिन सोमवार को प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राएं ये गीत इस गीत को गा रहे हैं और सरकार के खिलाफ हुंकार भर रहे हैं. इन छात्रों की एक ही मांग है. JPSC-JSSC CGL की परीक्षाओं को रद्द करना और परीक्षाओं में हुई धांधली की CBI की जांच.
यह सिर्फ गीत नहीं, आदिवासी प्रतिरोध का एंथम है. झारखंड के जंगलों, पहाड़ों और आंदोलनों में आज भी गाया जाता है.
इस गीत को मधु मंसूरी हंसमुख ने गाया है. इस आने में झारखंडी अस्मिता की पुकार है. इसमें विस्थापन, पलायन, बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं का गुस्सा है. इस गीत में मधु मंसूरी का संदेश है- "हमारी जड़ें यहीं हैं. हमारा जीवन यहीं है. हम न तो अपनी माटी छोड़ेंगे, न अपना संघर्ष. विकास अगर हमें उजाड़कर आता है, तो हम उसे स्वीकार नहीं करेंगे."
यह गीत सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, प्रतिरोध और आत्मसम्मान का जीवंत पुकार है.
यह गीत सत्ता के खिलाफ उलगुलान की आवाज है. झारखंड में क्रांति को स्थानीय भाषा में उलगुलान कहा जाता है.
धरनास्थल पर एक छात्र ने साफ कहा है कि हम शांति से क्रांति करेंगे.
स्थानीय गीतों के अलावा छात्र राष्ट्र गान भी गा रहे हैं.
भइया थोड़ा और प्रेशर मारो न...
रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र संघर्षों में तपे हैं. इसके लिए प्रोटेस्ट मार्च के दौरान जब छात्रों पर पानी की बौछार की गई थी. तो वे उसी पानी में डांस करने लगे. छात्रों ने कहा -भइया थोड़ा और प्रेशर मारो न... जैसे ही छात्रों पर पानी की बौछार हुई छात्र और भी झूमकर नाचने लगे. छात्रों ने झुमते हुए पुलिसकर्मियों से कहा- भइया, थोड़ा और प्रेशर दीजिए, बहुत गर्मी है.
बता दें कि आज झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जन्मदिन है. छात्र बार बार सीएम से अपनी मांगें दोहरा रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से नया बयान नहीं आया है.
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सोमवार को झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करते हुए परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ़ विरोध कर रहे हज़ारों नौकरी के उम्मीदवारों को वॉटर कैनन का सामना करना पड़ा; उन्होंने एक के बाद एक कई बैरिकेड तोड़े.
हाथों में तिरंगा और प्लेकार्ड लिए प्रदर्शनकारी नाचने लगे, जब नए विधानसभा कॉम्प्लेक्स की ओर जाने वाली सड़क पर जगन्नाथपुर मंदिर के पास आखिरी बैरिकेड पर पहुंचने पर पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया.
JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो, जो इस मुद्दे पर नौ दिनों से अनशन पर हैं, 10.5 किलो वज़न घटने के बावजूद एम्बुलेंस में बैठकर मार्च में शामिल हुए. उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर लिए हुए देखा गया.
उन्होंने कहा, "हम शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे हैं, और हम सभी से अपील करते हैं कि वे शांति बनाए रखने में हमारी मदद करें. हम उन लाखों छात्रों की आवाज़ उठा रहे हैं जो अपने सपनों और करियर के लिए लड़ रहे हैं... मेरी सेहत बिगड़ रही है."
प्रदर्शनकारियों के हाथों में जो प्लेकार्ड थे, उन पर लिखा था "JSSC-CGL परीक्षा रद्द करें या CBI जांच कराएं", "CID, JSSC पर छापा मारने से क्यों बच रही है?" और "निष्पक्ष जांच कराएं, सच सामने लाएं."
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "अगर हम विधानसभा तक नहीं पहुँच सकते, तो हमारी आवाज़ उन तक पहुंचनी चाहिए. हम सरकार से नहीं डरते, जो हमारे साथ देशद्रोहियों जैसा व्यवहार कर रही है. हमें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
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