'जब एक युवा को डिग्री मिलती है तो उसके सीने में अपने परिवार के सपने और एक सुरक्षित भविष्य की उम्मीद होती है. लेकिन जब वही युवा सिस्टम की लापरवाही और पेपर लीक के जाल में फंसकर दर-दर भटकने को मजबूर हो जाता है, तो उसका दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.
मैं खुद एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हूं. झारखंड के इन होनहार छात्रों का यह दर्द बहुत करीब से महसूस कर सकता हूं जो अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन सिस्टम के भ्रष्टाचार के आगे बेबस नजर आते हैं. आज हालात यह हैं कि परीक्षाओं में धांधली और बार-बार रद्द होने वाले पेपरों ने युवाओं के सपनों को चकनाचूर कर दिया है.'
ये कहना है रांची से 275 किलोमीटर दूर देवघर में प्रोटेस्ट में शामिल होने आए विक्रम कुमार का. दरअसल, झारखंड की राजधानी रांची में इन दिनों राज्यभर से आए हजारों छात्र-छात्राएं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. वे यह मांग कर रहे हैं कि 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को तुरंत रद्द किया जाए. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए.
देवघर से आए युवा इंजीनियरिंग ग्रेजुएट विक्रम कुमार ने झारखंड के युवाओं की बदहाल स्थिति और सिस्टम के बारे में इंडिया टूडे से बात की. उन्होंने झारखंड अलग राज्य बनने के पिछले 26 सालों में असिस्टेंट इंजीनियर के पदों के लिए अब तक सिर्फ तीन बार 2007, 2013 और 2019 में ही परीक्षाएं हुई हैं. 2019 के बाद से एक भी परीक्षा नहीं हुई है, जिसके चलते हजारों युवा ओवरएज होने की कगार पर पहुंच गए हैं.
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RTI के खुलासे से सामने आया खाली सीटों का सच
विक्रम कुमार कहते हैं, 'युवाओं द्वारा RTI के जरिए निकाले गए आंकड़ों के मुताबिक, विभागों में कुल स्वीकृत पदों में करीब 39 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं. इसके बावजूद सरकार नई वैकेंसी निकालने में टालमटोल कर रही है. विक्रम ने बताया कि उन्होंने और उनके साथियों ने रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट और कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग के तमाम चक्कर काटे, मंत्रियों और मुख्यमंत्री से मुलाकात की, लेकिन हर जगह से उन्हें केवल झूठे आश्वासन ही मिले.
'हर स्तर पर कोशिश के बाद अब सड़कों पर लड़ रहे लड़ाई'
विक्रम का कहना है कि युवाओं ने वैकेंसी की मांग को लेकर हर मुमकिन लोकतांत्रिक तरीका अपना लिया है. पत्राचार, आरटीआई, मंत्रियों से गुहार, विधानसभा में सवाल उठवाने से लेकर सोशल मीडिया पर ट्विटर अभियान तक हर जगह कोशिश की गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा. मॉनसून सत्र के दौरान भी इन युवाओं ने अपनी बात उठाने की कोशिश की है.
विक्रम ने दर्द बयां करते हुए कहा, 'झारखंड में कहावत है...'लड़ के लिया झारखंड'. आज हमारी हालत ऐसी हो गई है कि हमें वैकेंसी निकलवाने के लिए भी लड़ना पड़ रहा है, परीक्षा के लिए लड़ना होगा, रिजल्ट के लिए लड़ना होगा और फिर पेपर लीक जैसी समस्याओं के खिलाफ भी लड़ना ही पड़ेगा.'
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बीआईटी सिंदरी जैसे प्रतिष्ठित सरकारी कॉलेज से पास आउट 29 वर्षीय विक्रम कुमार का कहना है कि झारखंड में हर साल लगभग 12,000 इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स पास होकर निकल रहे हैं. राज्य में आईआईटी धनबाद, एनआईटी जमशेदपुर, बीआईटी मेसरा और बीआईटी सिंदरी जैसे बड़े संस्थान होने के बावजूद यहां के युवाओं को अपनी ही मिट्टी में रोजगार के मौके नहीं मिल पा रहे हैं.
उन्होंने सरकार से मांग की है कि पथ निर्माण विभाग और कार्मिक विभाग तुरंत सहायक अभियंता के खाली पदों पर विज्ञापन जारी करें. राज्य सरकार एक प्रॉपर रिक्रूटमेंट कैलेंडर जारी करे, जिसमें परीक्षाओं की तारीखें तय हों और उनका सख्ती से पालन किया जाए. पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसी व्यवस्थागत कमियों को पूरी तरह रोका जाए ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके.
प्रीति चौधरी