'मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करो', शिवसेना ने उठाई 'हिंदू संरक्षण बोर्ड' की बड़ी मांग

शिवसेना UBT ने केंद्र सरकार से हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने और चारों शंकराचार्यों के नेतृत्व में 'हिंदू संरक्षण बोर्ड' बनाने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि हाल के मंदिर विवादों के बाद पारदर्शी और स्वतंत्र प्रबंधन की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस हो रही है.

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मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए जम्मू में शिवसेना का प्रदर्शन. (Photo: ITG) मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए जम्मू में शिवसेना का प्रदर्शन. (Photo: ITG)

सुनील जी भट्ट

  • जम्मू,
  • 27 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:57 PM IST

शिवसेना UBT ने देशभर के हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त करने की मांग उठाई है. जम्मू-कश्मीर के इंदिरा चौक पर हुए प्रदर्शन में मंदिरों के प्रबंधन में बढ़ते सरकारी हस्तक्षेप का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया. प्रदर्शनकारियों ने हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने और उनके लिए स्वतंत्र व्यवस्था बनाने की मांग की. इसके समाधान के लिए केंद्र सरकार से चारों शंकराचार्यों के नेतृत्व में एक स्वतंत्र 'हिंदू संरक्षण बोर्ड' बनाने को कहा गया है. यह मांग ऐसे समय में आई है जब हाल ही में कई बड़े मंदिरों के प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. इस फैसले से मंदिरों की व्यवस्था में पारदर्शिता आने की उम्मीद जताई जा रही है.

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प्रदर्शन के दौरान शिवसेना प्रदेश अध्यक्ष मनीष साहनी ने हाल के कुछ बड़े विवादों का जिक्र करते हुए चिंता जताई. उन्होंने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे और जमीन के लेन-देन को लेकर उठे सवाल, माता वैष्णो देवी भवन में चढ़ाई गई चांदी की क्वालिटी पर हुआ विवाद, इसके अलावा तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू प्रसाद के मामले ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी चोट पहुंचाई है. इन घटनाओं से मंदिर कमेटियों की साख खराब होती है, इसलिए अब एक ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जो पूरी तरह स्वतंत्र और जवाबदेह हो.

चढ़ावे के पैसे का सही इस्तेमाल हो

मांग में इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिरों में जो भी दान या संपत्ति चढ़ाई जाती है, उसका पूरा हिसाब-किताब पारदर्शी होना चाहिए. यह पैसा केवल हिंदू धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक और जनकल्याणकारी कामों में ही इस्तेमाल होना चाहिए. जिस समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए लोग अपनी गाढ़ी कमाई मंदिर में अर्पित करते हैं, वह धन उसी धर्म के उत्थान और शिक्षा के विकास पर खर्च होना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक या प्रशासनिक काम में लगे.

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प्रदर्शन के दौरान मनीष साहनी ने कहा कि इस मुद्दे पर चारों शंकराचार्यों को भी पत्र भेजा गया है. उनसे देशभर के हिंदू मंदिरों की स्वायत्तता, गरिमा और सनातन परंपराओं की रक्षा के लिए नेतृत्व देने का आग्रह किया गया है. इसके अलावा उन्होंने बताया कि अब समय आ गया है कि मंदिरों को राजनीतिक और प्रशासनिक दखल से बाहर रखा जाए, ताकि उनकी पवित्रता और पारदर्शिता बनी रहे.

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