4 साल बाद नजरबंदी से रिहा हुए हुर्रियत नेता मीरवाइज, कश्मीरी पंडितों पर कही ये बात

ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में शुक्रवार को मीरवाइज ने कहा कि हमारा रुख यह है कि जम्मू-कश्मीर का एक हिस्सा भारत में है, दूसरा पाकिस्तान में और तीसरा चीन में है. ये सभी जम्मू-कश्मीर को वैसा ही बनाते हैं जैसा अगस्त 1947 में अस्तित्व में था. लोग विभाजित हो गए हैं और यह एक वास्तविकता है कि इस मुद्दे को हल करने की जरूरत है, जिसका अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी समर्थन करता है.

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हुर्रियत कांफ्रेंस अध्यक्ष मीरवाइज हुर्रियत कांफ्रेंस अध्यक्ष मीरवाइज

aajtak.in

  • श्रीनगर,
  • 22 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 6:19 PM IST

चार साल की नजरबंदी से शुक्रवार को रिहाई के बाद पहली बार सामेन आए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने अपने अलगाववादी गठबंधन के रुख को दोहराया. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए. कश्मीर के लोग समुदायों और राष्ट्रों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास करते हैं और उन्होंने हमेशा कश्मीरी पंडितों की वापसी की वकालत की है.

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उन्होंने कहा कि हमने हमेशा अपने पंडित भाइयों को घाटी लौटने के लिए आमंत्रित किया है. हमने हमेशा इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने से इनकार किया है. यह एक मानवीय मुद्दा है.

ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में शुक्रवार को मीरवाइज ने कहा कि हमारा रुख यह है कि जम्मू-कश्मीर का एक हिस्सा भारत में है, दूसरा पाकिस्तान में और तीसरा चीन में है. ये सभी जम्मू-कश्मीर को वैसा ही बनाते हैं जैसा अगस्त 1947 में अस्तित्व में था. लोग विभाजित हो गए हैं और यह एक वास्तविकता है कि इस मुद्दे को हल करने की जरूरत है, जिसका अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी समर्थन करता है. 

'जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए ये मानवीय मुद्दा'

उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजन रेखा के कारण कई परिवार अलग हो गए हैं और वे अपनी खुशियां मनाने और अपने दर्द साझा करने के लिए एक-दूसरे को देखने और मिलने के लिए तरस रहे हैं. यह कुछ लोगों के लिए एक भौगोलिक मुद्दा हो सकता है, लेकिन यह जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानवीय मुद्दा है. हमें भूगोल या क्षेत्र के विचारों से ऊपर उठकर मानवीय मूल्यों और रिश्तों को समझना होगा और फिर मुद्दों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा.

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हुर्रियत अध्यक्ष ने यूक्रेन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान कि यह युद्ध का युग नहीं है, का जिक्र करते हुए कहा कि यह भावना सच है. हमने हमेशा हिंसा से इतर अन्य विकल्प के माध्यम से समाधान के प्रयासों में विश्वास किया है. इस मार्ग पर चलने के कारण हमें व्यक्तिगत रूप से कष्ट सहना पड़ा है.

'लोग समाधान और शांति चाहते हैं'

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के हितों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने के अलावा हमारी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं है, जो हमारी मूल चिंता है और लोग समाधान और शांति चाहते हैं. हम चाहते हैं कि मुद्दे का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से हो ताकि लोगों को आगे आने वाली कठिनाइयों से छुटकारा मिल सके. मुद्दों के समाधान के बाद शांति और समृद्धि का एक नया चरण शुरू हो सकता है.

अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से नजरबंद थे मीरवाइज

बता दें कि अगस्त 2019 में संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के मद्देनजर हिरासत में लिए जाने के चार साल बाद हुर्रियत अध्यक्ष को नजरबंदी से रिहा कर दिया गया है. अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का जिक्र करते हुए मीरवाइज ने कहा कि इसके बाद का चरण कश्मीर के लोगों के लिए आसान नहीं रहा है. हमारी पहचान पर हमले हुए हैं. अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाना, जम्मू-कश्मीर को राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनाना, लद्दाख को उससे अलग करना और उसके बाद पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से लगातार लगाए जा रहे नए कानून और आदेश, दुर्भाग्य से अशक्तीकरण के कठोर एकतरफा फैसले हैं.'

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