30 दिन... 33 घर... 128 करोड़ का नुकसान! कांगड़ा में दरकते पहाड़ों के बीच डरावने हिसाब की कहानी

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मानसून ने भारी तबाही मचाई है. एक महीने के भीतर जिले को करीब 128 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. 33 पक्के मकान पूरी तरह ढह गए हैं, 39 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और 39 मवेशियों की मौत हुई है. मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसके बाद प्रशासन ने लोगों से भूस्खलन संभावित इलाकों से दूर रहने की अपील की है.

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मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट. (Photo: ITG) मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट. (Photo: ITG)

पूजा शर्मा

  • धर्मशाला,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:58 PM IST

मानसून पहाड़ों में सिर्फ बारिश लेकर नहीं आया. कहीं पहाड़ दरक गए, कहीं मकान मलबे में बदल गए, तो कहीं लोगों की सालों की कमाई कुछ मिनटों में मिट्टी में दब गई. हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा जिला पिछले एक महीने से ऐसी ही तस्वीरें देख रहा है. अब प्रशासन ने नुकसान का जो आंकड़ा जारी किया है, वह इस तबाही की गंभीरता बताने के लिए काफी है.

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जिले में मानसून की एंट्री के बाद सिर्फ एक महीने के भीतर करीब 128 करोड़ का नुकसान हो चुका है. सबसे ज्यादा मार लोक निर्माण विभाग (PWD) और जल शक्ति विभाग पर पड़ी है. सड़कें टूटी हैं, ढांचागत सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं और कई इलाकों में भूस्खलन ने हालात बिगाड़ दिए.

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कांगड़ा के डिप्टी कमिश्नर हेमराज बैरवा के मुताबिक, अब तक जिले में 33 पक्के मकान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं. इसके अलावा 39 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है. बारिश और भूस्खलन के कारण 39 मवेशियों की भी मौत हुई है, जिससे ग्रामीण परिवारों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है.

सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका बोह वैली रहा है. यहां लगातार बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया. कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े और प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने पड़े.

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हालांकि राहत की बात यह है कि जिले में बिजली और पेयजल आपूर्ति सामान्य बनी हुई है. प्रशासन के मुताबिक, पालमपुर क्षेत्र में केवल दो छोटे लिंक रोड बंद हैं, जिन्हें जल्द बहाल करने की कोशिश चल रही है. बाकी अधिकांश सड़कें यातायात के लिए खुली हैं.

प्रशासन का कहना है कि मुख्यमंत्री प्रभावित बोह वैली का दौरा कर चुके हैं और पीड़ित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज का ऐलान किया जा चुका है. वहीं एसडीएम, तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीमें अलग-अलग इलाकों में पहुंचकर प्रभावित लोगों को तत्काल राहत दिला रही हैं. जहां भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, वहां लोगों के लिए तिरपाल और अन्य जरूरी इंतजाम भी किए जा रहे हैं.

लेकिन मुश्किल अभी टली नहीं है. मौसम विभाग ने कांगड़ा जिले के लिए अगले दो दिनों का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. लगातार बारिश के कारण पहाड़ों की मिट्टी पूरी तरह पानी से संतृप्त हो चुकी है. ऐसे में नए भूस्खलन का खतरा बना हुआ है.

डिप्टी कमिश्नर हेमराज बैरवा ने लोगों से अपील की है कि वे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा न करें. अगर किसी घर या इलाके में खतरे के संकेत दिखाई दें, तो सामान से ज्यादा अपनी और परिवार की जान को प्राथमिकता दें और तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं.

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प्रशासन का कहना है कि उसकी पहली प्राथमिकता किसी भी हाल में जनहानि रोकना है. सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और राहत व पुनर्बहाली का काम युद्धस्तर पर जारी है. हिमाचल में हर साल मानसून चुनौतियां लेकर आता है, लेकिन इस बार कांगड़ा की तस्वीरें बता रही हैं कि पहाड़ों पर बारिश अब सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि एक बड़ा इम्तेहान बनती जा रही है.

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