न बिजली, न जनरेटर चलाने की छूट, गुरुग्राम की 1500 फैक्ट्रियों में 40 घंटे से काम ठप, करोड़ों के नुकसान का अंदेशा

बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल से गुरुग्राम में बिजली संकट गहरा गया है. दौलताबाद, कादीपुर और सेक्टर-37 के औद्योगिक क्षेत्रों में 36 से 40 घंटे से बिजली आपूर्ति बाधित है. 1500 से अधिक औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन ठप होने से करोड़ों के नुकसान का अंदेशा है. लाखों उपभोक्ता भी बिजली संकट से प्रभावित हुए हैं.

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बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से गुरुग्राम बेहाल. (Photo: Screengrab) बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से गुरुग्राम बेहाल. (Photo: Screengrab)

नीरज वशिष्ठ

  • गुरुग्राम ,
  • 23 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:38 PM IST

हरियाणा की साइबर सिटी गुरुग्राम में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने उद्योगों से लेकर आम लोगों तक की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में प्रदेशभर में चल रही हड़ताल के बीच शहर के कई इलाकों में पिछले 36 से 40 घंटे से बिजली आपूर्ति बाधित है. इसका सबसे ज्यादा असर औद्योगिक क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है, जहां फैक्ट्रियों की मशीनें बंद पड़ी हैं और उत्पादन ठप हो गया है. त्योहारी सीजन से ठीक पहले आए इस संकट से उद्योगपतियों को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका है. गुरुग्राम के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों सेक्टर-37, दौलताबाद और कादीपुर में बिजली संकट ने उद्योगों की रफ्तार रोक दी है. इन क्षेत्रों की 1500 से अधिक औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हुआ है. कई इकाइयों में बिजली आपूर्ति लंबे समय से बाधित होने के कारण कामकाज पूरी तरह बंद पड़ा है.

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औद्योगिक इकाइयों में मशीनें बंद होने से कंपनियों के सामने समय पर ऑर्डर पूरे करने की चुनौती खड़ी हो गई है. ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों और निर्यात से जुड़ी इकाइयों पर इसका खास असर पड़ रहा है. इन कंपनियों के पास करोड़ों रुपये के ऑर्डर लंबित हैं, लेकिन बिजली नहीं होने के कारण उत्पादन आगे नहीं बढ़ पा रहा है. त्योहारी सीजन के ठीक पहले आए इस संकट ने उद्योगपतियों की चिंता बढ़ा दी है. उत्पादन बंद रहने से न केवल कंपनियों के कारोबार पर असर पड़ रहा है, बल्कि फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को भी खाली बैठना पड़ रहा है. बिजली आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो उद्योगों को होने वाला नुकसान और बढ़ने की आशंका है.

8.5 लाख उपभोक्ताओं वाले शहर में बड़ा संकट

बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद उद्योगों के सामने सबसे बड़ी परेशानी वैकल्पिक व्यवस्था की है. प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू ग्रेप-1 के नियमों के तहत जनरेटर चलाने पर सख्त पाबंदी है. ऐसे में उद्योगपति बिजली कटौती के दौरान जनरेटर के सहारे उत्पादन जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं. एक तरफ बिजली की आपूर्ति नहीं हो रही है, तो दूसरी तरफ जनरेटर चलाने पर कार्रवाई और भारी चालान का डर बना हुआ है. इस वजह से कई औद्योगिक इकाइयों के सामने काम बंद रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. उद्योगपतियों के लिए यह स्थिति इसलिए भी मुश्किल है, क्योंकि उनके पास समय पर पूरे किए जाने वाले ऑर्डर हैं और उत्पादन रुकने से उनकी कारोबारी समयसीमा प्रभावित हो रही है.

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बिजली संकट का असर सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है. गुरुग्राम में करीब 8.5 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से 5.5 लाख से अधिक लोगों के सीधे तौर पर प्रभावित होने की बात सामने आई है. शहर के कई रिहायशी इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है. पालम विहार, न्यू पालम विहार, अशोक विहार, सेक्टर-4, सेक्टर-5, सेक्टर-9, सेक्टर-104, सोहना डिवीजन और फर्रुखनगर समेत कई इलाकों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बिजली नहीं होने से घरों में रोशनी और पानी की समस्या पैदा हो गई है. लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने से लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं.

सड़कों पर उतरे लोग, कई जगह जाम

लगातार बिजली कटौती से परेशान कुछ इलाकों के लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया और जाम लगाया. बिजली संकट के कारण आम लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. वहीं, अधिकारियों के भी हड़ताल पर होने के चलते वैकल्पिक व्यवस्था करने में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं. इस स्थिति ने बिजली आपूर्ति बहाल करने की चुनौती को और बढ़ा दिया है. एक ओर घरेलू उपभोक्ता बिजली और पानी की समस्या से जूझ रहे हैं, तो दूसरी ओर औद्योगिक इकाइयों में काम बंद होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है.

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बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल के बीच गुरुग्राम में संकट लगातार गंभीर बना हुआ है. उद्योगपतियों की चिंता है कि बिजली आपूर्ति बहाल होने में देरी से लंबित ऑर्डर, उत्पादन और कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है. औद्योगिक क्षेत्र के कारोबारियों ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान निकालने की मांग की है. अब उद्योगों और आम उपभोक्ताओं की नजर बिजली आपूर्ति बहाल होने पर है, ताकि फैक्ट्रियों में काम दोबारा शुरू हो सके और घरों में भी सामान्य स्थिति लौट सके.

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