गुरुग्राम में गुरुवार रात हजारों लोगों को ब्लैकआउट का सामना करना पड़ा. हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के चलते कई जिलों में बिजली सप्लाई बाधित हुई. इसका असर घरों, पानी की सप्लाई और औद्योगिक इकाइयों पर भी पड़ा. गुरुग्राम के कई इलाकों में आधी रात के आसपास बिजली चली गई. सुबह तक लोग परेशान रहे. दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के टोल-फ्री नंबर पर आधी रात से सुबह 7 बजे तक करीब 5,500 शिकायतें दर्ज की गईं.
इस संकट के पीछे बिजली कर्मचारियों और सरकार के बीच निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने को लेकर विवाद है. हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) ने 19 अक्टूबर को इलेवन पावर को गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस दिया था. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे बिजली वितरण के निजीकरण का रास्ता खुलेगा, नौकरियों पर खतरा आएगा और सरकारी बिजली कंपनी कमजोर हो सकती है. इसी फैसले के विरोध में कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू की.
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क्या है बिजली कटौती की असली वजह?
हरियाणा बिजली नियामक आयोग ने 19 अक्टूबर को इलेवन पावर को गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस दिया. इसका मतलब है कि निजी कंपनी सरकारी बिजली वितरण निगम DHBVN के साथ उसी क्षेत्र में बिजली सप्लाई करने के लिए अपना नेटवर्क विकसित कर सकती है.
यह लाइसेंस बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 14 के तहत दिया गया है. इस प्रावधान के तहत नियामक शर्तों को पूरा करने पर एक ही भौगोलिक क्षेत्र में एक से ज्यादा बिजली वितरण कंपनियां काम कर सकती हैं.
बिजली कर्मचारियों ने इस फैसले का विरोध किया है. उनका कहना है कि समानांतर वितरण व्यवस्था अप्रत्यक्ष निजीकरण की तरह है. उन्हें आशंका है कि निजी कंपनी के आने से सरकारी बिजली निगम का कारोबार घट सकता है, कर्मचारियों की नौकरियों पर असर पड़ सकता है और सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वितरण व्यवस्था कमजोर हो सकती है.
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि निजी कंपनी को लाइसेंस दिए जाने से सीधे बिजली कटौती नहीं हुई. तत्काल संकट कर्मचारियों की हड़ताल के बाद पैदा हुआ, जिससे बिजली की खराबी ठीक करने और सप्लाई बहाल करने का काम प्रभावित हुआ.
निजी कंपनी के लाइसेंस पर इतना विवाद क्यों?
यह विवाद सिर्फ कर्मचारियों की नौकरियों तक सीमित नहीं है. इसके पीछे बिजली वितरण से जुड़ा आर्थिक मॉडल भी है. DHBVN दक्षिण हरियाणा के बड़े हिस्से में बिजली सप्लाई करता है, जिसमें गुरुग्राम भी शामिल है. निजी कंपनी के आने के बाद उपभोक्ताओं को भविष्य में बिजली सप्लायर चुनने का विकल्प मिल सकता है, बशर्ते इलेवन पावर अपना नेटवर्क तैयार करके काम शुरू करे.
निजी प्रतिस्पर्धा के समर्थकों का तर्क है कि ग्राहक खोने का डर बिजली कंपनियों को बेहतर सेवा देने और बुनियादी ढांचे में निवेश करने के लिए प्रेरित कर सकता है. लेकिन DHBVN ने आशंका जताई है कि अगर बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता निजी कंपनी की ओर चले गए तो उसकी कमाई पर बड़ा असर पड़ेगा.
HERC के सामने दिए गए अपने पक्ष में DHBVN ने कहा था कि वित्त वर्ष 2025-26 में गुरुग्राम और नूंह का उसके कुल बिजली बिक्री में 35.23 फीसदी और कुल राजस्व में 42.98 फीसदी हिस्सा था. निगम का अनुमान है कि अगर इन इलाकों के उपभोक्ताओं का एक छोटा हिस्सा भी इलेवन पावर के पास चला जाता है तो उसे बड़ा वित्तीय नुकसान हो सकता है.
ये आंकड़े DHBVN के अनुमान हैं, साबित हो चुका नुकसान नहीं. इलेवन पावर ने निगम के आकलन पर सवाल उठाए हैं. कंपनी का कहना है कि उसकी कारोबारी योजना में मौजूदा ग्राहकों के सीमित संख्या में दूसरी कंपनी के पास जाने का अनुमान है, जबकि उसके कारोबार का बड़ा हिस्सा नए कनेक्शन से आ सकता है.
इस विवाद का एक बड़ा पहलू यह भी है कि बिजली वितरण में नेटवर्क और दूसरे बुनियादी ढांचे पर काफी खर्च होता है. वहीं, कुछ व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं से मिलने वाला राजस्व दूसरी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर बिजली देने की व्यवस्था को सहारा देता है. अगर सरकारी कंपनी के ज्यादा भुगतान करने वाले ग्राहक कम हो जाते हैं तो बाकी खर्च का बोझ कैसे संभाला जाएगा, यह सवाल उठ सकता है.
गुरुग्राम के कई इलाकों में बिजली गुल
गुरुग्राम में सेक्टर 2, अशोक विहार, सेक्टर 4 और 5, दयानंद कॉलोनी, भीमगढ़ खेड़ी, पालम विहार, सेक्टर 23, राजेंद्र पार्क, रतन विहार, विष्णु गार्डन और सेक्टर 105 समेत कई इलाकों से बिजली कटौती की शिकायतें आईं. लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई. लोगों को सुबह के रोजमर्रा के काम निपटाने में परेशानी हुई. बिजली कटौती का असर सिर्फ रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं रहा. दौलताबाद, कादीपुर और सेक्टर 37 की औद्योगिक इकाइयों में भी सप्लाई बाधित होने की शिकायतें सामने आईं. परेशान लोग सड़कों पर उतरकर विरोध जताने लगे.
हरियाणा के दूसरे जिलों में भी असर
बिजली संकट गुरुग्राम से बाहर भी देखा गया. सोनीपत के गन्नौर, गोहाना और खरखौदा समेत कई इलाकों में बिजली गुल होने की खबरें आईं. कच्चा क्वार्टर बाजार के कारोबारियों ने चेतावनी दी कि अगर सप्लाई बहाल नहीं हुई तो वे दुकानें बंद रख सकते हैं.
रेवाड़ी में बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों ने पल्हावास के पास नेशनल हाईवे-352 जाम कर दिया. इससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. बाद में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने लोगों को समझाकर रास्ता खुलवाया. अंबाला से भी कई इलाकों में अंधेरा छाए रहने की तस्वीरें सामने आईं.
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल 21 अक्टूबर की रात 10 बजे शुरू हुई थी और इसे 24 अक्टूबर तक जारी रखने का कार्यक्रम था. हड़ताल से पहले ही लोगों को चेतावनी दी गई थी कि बिजली में खराबी आने पर उसे ठीक करने में देरी हो सकती है.
बिजली कटौती से आम लोगों और कारोबार पर असर
लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से पानी की सप्लाई बाधित हुई. ऊंची इमारतों में लिफ्ट और पानी के पंप बिजली पर निर्भर होते हैं. इसके अलावा घर से काम करने वाले लोगों को बिजली और इंटरनेट की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
औद्योगिक इकाइयों में सप्लाई बाधित होने से उत्पादन रुकने, ऑर्डर में देरी और आर्थिक नुकसान की आशंका है. गुरुग्राम, सोनीपत और रेवाड़ी में लोगों और कारोबारियों के विरोध से साफ है कि बिजली कटौती ने आम जिंदगी के साथ-साथ व्यापार को भी प्रभावित किया.
हड़ताल पहले से घोषित थी, इसके बावजूद बिजली सप्लाई बनाए रखने की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं. प्रशासन ने प्रदर्शन से पहले अस्पतालों, पानी की व्यवस्था, मेट्रो और दूसरी जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे. हालांकि, इन इंतजामों की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए यह देखना होगा कि कितनी शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई हुई और बिजली बहाल करने में कितना समय लगा.
अब आगे क्या होगा?
हरियाणा सरकार ने कहा है कि वह HERC के फैसले को बिजली संबंधी मामलों के अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में चुनौती देगी और लाइसेंस पर रोक लगाने की मांग करेगी. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कर्मचारियों से हड़ताल पर फिर से विचार करने की अपील की है. ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी कहा है कि सरकार इस फैसले को कानूनी तौर पर चुनौती देगी.
हड़ताल 24 अक्टूबर तक जारी रखने का कार्यक्रम था. ऐसे में तत्काल चुनौती बिजली सप्लाई बहाल करने, लंबित शिकायतों का निपटारा करने और घरों, पानी की व्यवस्था तथा औद्योगिक इकाइयों पर पड़ रहे असर को कम करने की है.
लंबे समय में निजी कंपनी के लाइसेंस पर विवाद नियामक और कानूनी प्रक्रिया से तय होगा. अगर लाइसेंस बरकरार रहता है तो इलेवन पावर को पहले अपना नेटवर्क तैयार करना होगा और संचालन शुरू करना होगा. इसके बाद ही उपभोक्ताओं के लिए प्रस्तावित प्रतिस्पर्धा हकीकत बन सकेगी.
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने दो अहम सवाल खड़े किए हैं. पहला, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान जरूरी सेवाओं को बाधित होने से बचाने के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम थे. दूसरा, क्या बिजली वितरण में निजी कंपनियों को शामिल करने से सेवा बेहतर होगी या इससे सरकारी बिजली निगम की वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां पैदा होंगी. इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में कानूनी फैसलों, निजी कंपनी की तैयारी और बिजली सप्लाई की स्थिति से तय होंगे.
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