सुबह का वक्त था. घर से एक बेटी स्कूल के लिए निकली थी. स्कूल बैग कंधे पर था. उम्र 16 साल. फरीदाबाद के डबुआ की रहने वाली छात्रा 11वीं में पढ़ती थी. उसके पिता के लिए भी ये किसी और दिन जैसा ही दिन था. बेटी स्कूल जाएगी, पढ़ाई करेगी और फिर वापस घर लौट आएगी. लेकिन उस दिन ऐसा नहीं हुआ. शाम होने से पहले स्कूल से ऐसी खबर आई, जिसने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी.
छात्रा स्कूल की तीसरी मंजिल से नीचे गिर गई थी. उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया. पहले प्राइवेट अस्पताल पहुंचाया गया, फिर वहां से बीके अस्पताल रेफर कर दिया गया. परिवार बेटी को लेकर अस्पताल पहुंचा. लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. अस्पताल में स्ट्रेचर पर छात्रा का शव था. जब मां वहां पहुंची तो स्ट्रेचर पर्दे के पीछे था. जैसे ही पर्दा हटा और मां की नजर पड़ी तो वह बेटी को देख दहाड़ें मारकर बिलख पड़ी.
जिस बेटी को सुबह स्कूल छोड़ा गया था, शाम को उस बेटी का शव लौटा. इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर उन आखिरी चार घंटों में हुआ क्या था?
यह घटना फरीदाबाद के डबुआ-गाजीपुर रोड स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल की है. पिता के मुताबिक, बेटी की क्लास में छात्राओं के बीच बिरयानी खाने को लेकर विवाद हुआ था. अब यहां से कहानी में दो अलग-अलग रास्ते निकलते हैं. पिता का आरोप है कि इस विवाद में उनकी बेटी की कोई गलती नहीं थी. इसके बावजूद उसे सजा दी गई. ये बात स्कूल की कुछ छात्राओं ने बताई.
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पिता का दावा है कि बेटी को करीब चार घंटे तक धूप में खड़ा रखा गया. चार घंटे. सोचिए... एक 16 साल की लड़की स्कूल में है. बाहर धूप है. परिवार का आरोप है कि वह घंटों वहां खड़ी रही. पिता के मुताबिक, इस घटना के बाद बेटी काफी आहत थी. फिर कुछ ऐसा हुआ, जिसने परिवार का दहला दिया. छात्रा स्कूल की तीसरी मंजिल तक पहुंची. और वहां से नीचे गिर गई.
अब जरा स्कूल का पक्ष सुनिए. स्कूल के प्रधानाचार्य ने छात्रा को सजा दिए जाने के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. उनका कहना है कि छात्रा को कोई सजा नहीं दी गई थी. प्रधानाचार्य के मुताबिक, छात्रा क्लास में बाथरूम जाने की बात कहकर बाहर निकली थी. इसके बाद वह स्कूल की तीसरी मंजिल पर पहुंची और वहां से छलांग लगा दी.
यहीं से इस कहानी में सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है. अगर स्कूल के मुताबिक छात्रा को सजा नहीं दी गई थी, तो फिर वह तीसरी मंजिल तक पहुंची कैसे? वह वहां क्यों गई? उस वक्त उसके साथ क्या हुआ? उसके मन में उस समय क्या चल रहा था? इन सवालों का जवाब अभी साफ नहीं है.
चार घंटे... जिनका सच सामने आना बाकी है
इस मामले में पिता का सबसे गंभीर आरोप वही चार घंटे हैं. पिता कहते हैं कि बेटी को धूप में खड़ा किया गया. स्कूल प्रबंधन का कहना है कि ऐसी कोई सजा दी ही नहीं गई. तो सच क्या है? क्या बिरयानी को लेकर वाकई झगड़ा हुआ था? अगर हुआ था, तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई? क्या छात्रा को सजा दी गई? क्या वह सचमुच घंटों धूप में खड़ी रही? और अगर ऐसा हुआ, तो उस दौरान किसी शिक्षक ने उसकी हालत पर ध्यान दिया या नहीं? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब आना बाकी है. छात्रा की मौत के पीछे की पूरी कहानी अभी सामने नहीं आई है.
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वहीं इस मामले को लेकर स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्रा बाथरूम जाने की बात कहकर क्लास से बाहर निकली थी. लेकिन उसके बाद वह तीसरी मंजिल पर पहुंच गई. तो बीच के उस रास्ते में क्या हुआ? क्या CCTV कैमरों में उसकी तस्वीर रिकॉर्ड हुई? क्या किसी शिक्षक या छात्र ने उसे वहां जाते देखा? तीसरी मंजिल पर उस वक्त कोई और था या नहीं? वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? और क्या स्कूल की तीसरी मंजिल पर छात्रों की आवाजाही सामान्य थी?
इन सवालों के जवाब इसलिए भी जरूरी हैं, क्योंकि मामला सिर्फ एक छात्रा की मौत का नहीं है. मामला यह भी है कि एक नाबालिग छात्रा स्कूल की तीसरी मंजिल तक पहुंची और किसी को भनक तक नहीं लगी.
पिता के सामने सवाल है- आखिर मेरी बेटी के साथ स्कूल में हुआ क्या था? एक तरफ उनका आरोप है कि छात्रा को सजा दी गई थी. करीब चार घंटे धूप में खड़ा रखा गया. दूसरी तरफ स्कूल कह रहा है कि छात्रा को कोई सजा नहीं दी गई. अगर पिता का आरोप सही है, तो सवाल है कि एक बच्ची के साथ ऐसा क्यों हुआ? और अगर स्कूल का दावा सही है, तो फिर सवाल है कि छात्रा ने तीसरी मंजिल से छलांग लगाने जैसा कदम किन परिस्थितियों में उठाया?
घटना की जानकारी मिलते ही डबुआ थाना पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और मामले की जांच शुरू कर दी. स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और छात्रा के परिजनों से जानकारी जुटाई जा रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्रा ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया. बिरयानी को लेकर विवाद हुआ या नहीं, ये भी जांच का हिस्सा है.
सुबह जिस घर से बेटी स्कूल के लिए निकली थी, वहां शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि कुछ घंटे बाद उसी घर में मातम होगा. एक स्कूल बैग होगा. एक यूनिफॉर्म होगी. किताबें होंगी. लेकिन उन्हें लेकर घर लौटने वाली छात्रा नहीं होगी. अब पुलिस की जांच को ये पता लगाना है कि उन आखिरी चार घंटों में आखिर क्या हुआ था? क्योंकि इस कहानी में सबसे बड़ा सवाल ये नहीं है कि छात्रा तीसरी मंजिल से गिरी. सबसे बड़ा सवाल ये है- वह तीसरी मंजिल तक पहुंची कैसे और क्यों? फिलहाल पूरे मामले की जांच चल रही है.
सचिन गौड़