सूरत शहर के भेस्तान इलाके में डेढ़ साल के बच्चे के सेफ्टी पिन निगलने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. घर में खेलते वक्त जमीन पर पड़ी खुली पिन मासूम के मुंह में चली गई और उसने उसे निगल लिया. कुछ देर बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी और वह रोने के साथ उल्टियां करने लगा.
मूल रूप से बिहार के रहने वाले अरशद मोहम्मद रायन भेस्तान में कपड़ा यूनिट में मजदूरी करते हैं. उनका डेढ़ वर्षीय बेटा आयन 24 अगस्त की सुबह घर में खेल रहा था. इसी दौरान उसने जमीन पर पड़ी खुली सेफ्टी पिन उठा ली और उसे निगल गया.
यह भी पढ़ें: 'खूबसूरती त्योहारों में, कपड़ों में नहीं', कंगना के बिकिनी कमेंट पर कृति सेनन का पलटवार! तोड़ी चुप्पी
परिवार को जब इस घटना का पता चला तो घबराहट फैल गई. बच्चे की मां अजमेरी खातून ने बताया कि पिन निगलने के बाद आयन उल्टी करने लगा. बेटे ने बताया कि बच्चे ने पिन निगल ली है. मां ने मुंह में उंगली डालकर देखने की कोशिश भी की, लेकिन पिन अंदर जा चुकी थी. इसके बाद परिवार उसे तुरंत नई सिविल अस्पताल लेकर पहुंचा.
एक्स-रे में दिखी भोजन नली में फंसी पिन
अस्पताल के ईएनटी विभाग में डॉक्टरों ने बच्चे की जांच की. एक्स-रे कराया गया तो भोजन नली के ऊपरी हिस्से में खुली सेफ्टी पिन फंसी हुई दिखाई दी. नुकीली पिन के कारण स्थिति गंभीर थी, इसलिए डॉक्टरों ने बिना देरी किए उसे निकालने का फैसला लिया.
ईएनटी विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर मृत्युंजय के मुताबिक, बच्चे के माता-पिता ने सेफ्टी पिन निगलने की जानकारी दी थी. जांच के बाद अन्न-नली में पिन फंसे होने की पुष्टि हुई. इसके बाद परिवार को एंडोस्कोपी के जरिए इसे निकालने की प्रक्रिया के बारे में समझाया गया और उनकी सहमति के बाद बच्चे को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया.
डॉक्टरों ने दूरबीन यानी एंडोस्कोपी और फोरसेप्स की सहायता से पिन को बाहर निकाला. करीब 30 से 45 मिनट में 2 सेंटीमीटर लंबी खुली सेफ्टी पिन सुरक्षित निकाल ली गई. इस पूरी प्रक्रिया के लिए किसी बड़े ऑपरेशन या चीर-फाड़ की जरूरत नहीं पड़ी.
निजी अस्पताल में 50-60 हजार का खर्च, यहां मुफ्त इलाज
परिवार के मुताबिक, पिन निकलने के बाद आयन को निगरानी में रखा गया. मां ने बताया कि बच्चा अब पूरी तरह ठीक है और खाना-पीना भी शुरू कर चुका है. डॉक्टरों ने उसे दो-तीन दिन अस्पताल में रखने की बात कही थी. दो दिन बाद उसकी हालत सामान्य होने पर परिवार को राहत मिली.
अजमेरी खातून ने बताया कि घटना के बाद वह बेहद डर गई थीं और रोने लगी थीं. उन्होंने कहा कि जब पिन अंदर गई थी, तब बच्चा पानी और दूसरी चीजें पी पा रहा था. अस्पताल आने के बाद केला खिलाने पर वह रोया और काफी उल्टियां कीं, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे भर्ती कर लिया.
इस तरह की प्रक्रिया का निजी अस्पताल में खर्च करीब 50 से 60 हजार रुपये तक हो सकता है, जबकि सूरत सिविल अस्पताल में यह उपचार पूरी तरह निशुल्क किया गया. समय रहते बच्चे को अस्पताल पहुंचाने से गंभीर खतरे को टाला जा सका.
समय पर इलाज नहीं मिलता तो हो सकता था बड़ा खतरा
डॉक्टरों के अनुसार, खुली सेफ्टी पिन जैसी नुकीली वस्तु भोजन नली या श्वास नली में छेद कर सकती है. इससे अंदरूनी चोट, फेफड़ों में संक्रमण और दम घुटने जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है. इसलिए बच्चे के किसी बाहरी वस्तु निगलने का जरा भी संदेह हो तो घर पर प्रयोग करने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है.
डॉक्टर मृत्युंजय ने माता-पिता को सलाह दी कि छोटी और नुकीली चीजें बच्चों की पहुंच से दूर रखी जाएं. सिक्के, बैटरी, सेफ्टी पिन और ऐसी अन्य वस्तुओं को खुले में नहीं छोड़ना चाहिए. घर में बड़े भाई-बहन हों तो उन्हें भी छोटे बच्चों के आसपास इन चीजों को लेकर सावधान रहने के लिए समझाना चाहिए.
फिलहाल, आयन खतरे से बाहर है और डॉक्टरों की निगरानी के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ है. इस घटना ने एक बार फिर छोटे बच्चों के आसपास छोटी वस्तुओं को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत सामने ला दी है.
संजय सिंह राठौर