गुजरात के सूरत जिले के कड़ोदरा इलाके से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां महज 15 महीने की मासूम वैशाली गणेश पांडे की पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई. यह गड्ढा लगातार हो रही बारिश के बाद पूरी तरह पानी से भर गया था.
इस हादसे के बाद परिवार ने पड़ोसी सोसायटी के कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि यह गड्ढा किसी सरकारी काम के लिए नहीं, बल्कि शिवम नगर सोसायटी के लोगों की आवाजाही रोकने के उद्देश्य से बिना अनुमति खुदवाया गया था.
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मासूम की मौत के बाद पूरे इलाके में आक्रोश है. परिवार न्याय की मांग कर रहा है, जबकि प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.
रास्ता रोकने के लिए खोदा गया था गड्ढा
घटना कड़ोदरा नगर पालिका क्षेत्र की शिवम नगर सोसायटी की है. मृतक बच्ची वैशाली अपने माता-पिता गणेश पांडे और सुधा पांडे के साथ यहीं रहती थी.
परिजनों के मुताबिक, घर के ठीक बगल में स्थित खुले मैदान में पड़ोसी श्रीनिवास ग्रीन सिटी सोसायटी के कुछ लोगों ने लोगों की आवाजाही रोकने के लिए लंबा-चौड़ा गड्ढा खुदवा दिया था. जब गड्ढा खोदा गया था, तब स्थानीय लोगों ने इसका विरोध भी किया था.
बताया गया कि बारिश शुरू होने के बाद गड्ढे में पानी भर गया और वह बाहर से सामान्य जलभराव जैसा दिखाई देने लगा. इसी गड्ढे ने बाद में मासूम वैशाली की जान ले ली.
कुछ मिनटों में मातम में बदल गईं खुशियां
मृतक बच्ची के पिता गणेश पांडे, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने बताया कि घटना के समय वह सूरत से बाहर थे.
उनके अनुसार, उनकी पत्नी सुधा पांडे घर के बाहर वैशाली के साथ बैठी थीं. कुछ देर के लिए वह झाड़ू रखने घर के अंदर चली गईं. जब वापस लौटीं तो बच्ची वहां नहीं थी.
पहले आसपास और पड़ोस में तलाश की गई. काफी देर तक खोजबीन के बाद शक होने पर परिवार घर के पास पानी से भरे गड्ढे तक पहुंचा. मां बिना देर किए पानी में उतर गईं और तलाश शुरू की. कुछ देर बाद वैशाली पेड़ के पास पानी के भीतर मिली. उसे तुरंत संजीवनी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
'गड्ढा नहीं खोदा होता तो मेरी बेटी जिंदा होती'
आजतक से बातचीत में पिता गणेश पांडे ने आरोप लगाया कि पड़ोसी सोसायटी के लोगों ने जानबूझकर रास्ता बंद करने के लिए गड्ढा खुदवाया था. जब इसका विरोध किया गया तो उनकी बात नहीं सुनी गई.
उन्होंने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि खुले गड्ढे में कोई बच्चा गिर सकता है, लेकिन इसके बावजूद गड्ढा नहीं भरा गया. उनका आरोप है कि अब तक पुलिस ने उनकी शिकायत पर एफआईआर भी दर्ज नहीं की है.
गणेश पांडे ने यह भी आरोप लगाया कि मामले को गड्ढे की जगह गटर का मामला बताने की कोशिश की जा रही है, जबकि उनके अनुसार यह रास्ता रोकने के उद्देश्य से की गई खुदाई थी. उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न्याय की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की.
मां बोलीं- अगर गड्ढा नहीं होता तो बेटी बच जाती
मृतक बच्ची की मां सुधा पांडे ने भी घटना के लिए गड्ढा खोदने वालों को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि अगर गड्ढा नहीं खोदा गया होता और उसमें पानी नहीं भरा होता तो उनकी बेटी आज जिंदा होती.
उन्होंने बताया कि बच्ची के गायब होने के बाद शक होने पर वह खुद पानी में उतर गईं और काफी तलाश के बाद बेटी को बाहर निकाला. अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
सुधा पांडे ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं था, बल्कि तीसरी बार इस तरह गड्ढा खुदवाया गया था. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसी को रास्ता बंद करने का अधिकार किसने दिया.
नगरपालिका ने माना- बिना अनुमति खोदा गया था गड्ढा
आजतक की टीम ने पूरे मामले को लेकर कड़ोदरा नगर पालिका के मुख्य अधिकारी पी. ए. चौधरी से भी बात की. उन्होंने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि गड्ढा सोसायटी के लोगों ने खुदवाया था और इसके लिए नगरपालिका से कोई अनुमति नहीं ली गई थी. उन्होंने कहा कि किसी भी खुदाई से पहले अनुमति लेना और "Call Before You Dig" प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है.
मुख्य अधिकारी के मुताबिक, पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद तथ्य सामने आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
पुलिस ने AD दर्ज की, कई सवाल अभी बाकी
इस मामले में कड़ोदरा जीआईडीसी पुलिस से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, फिलहाल Accidental Death (AD) का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. हालांकि अभी तक किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है.
इस दर्दनाक हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि गड्ढा बिना अनुमति के खोदा गया था तो जिम्मेदार कौन है? स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद उसे खुला क्यों छोड़ दिया गया? बारिश के मौसम में सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? इन सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आएंगे. फिलहाल 15 महीने की मासूम वैशाली की मौत ने एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी है और दोषियों पर कार्रवाई की मांग लगातार तेज होती जा रही है.
संजय सिंह राठौर