प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर को है. जन्मदिन से पहले गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर से उनके बचपन के दोस्त शामळदास मोदी की एक चिट्ठी सामने आई है. चिट्ठी पढ़ेंगे तो लगेगा जैसे कोई पुराना दोस्त अपने उस साथी को याद कर रहा है, जिसके साथ बचपन गुजरा था और जिसे आज पूरी दुनिया जानती है. शामलदास ने पीएम मोदी को 'श्रीकृष्ण' कहा है और खुद को उनका 'सुदामा' बताया है.
दोस्ती के इस पुराने रिश्ते को याद करते हुए शामळदास ने लिखा कि नरेंद्र मोदी ने जिंदगी में जो ठाना, उसे पूरा करके दिखाया. अपने दोस्त की कामयाबी पर गर्व जताते हुए उन्होंने कहा कि इससे उनका सीना चौड़ा हो जाता है. चिट्ठी में मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन से लेकर वडनगर के विकास और शहर की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने तक की बातें लिखी गई हैं.
'आप श्रीकृष्ण, मैं आपका सुदामा'
शामळदास की चिट्ठी का सबसे भावुक हिस्सा यही है. उन्होंने नरेंद्र मोदी को अपना 'श्रीकृष्ण' और खुद को 'सुदामा' कहा. दोनों की दोस्ती वडनगर के दिनों की है. वक्त बीतता गया, नरेंद्र मोदी का सफर आगे बढ़ता गया, लेकिन शामळदास के लिए बचपन का वह रिश्ता आज भी उतना ही खास है.
उन्होंने अपने दोस्त की कामयाबी को याद करते हुए लिखा कि एक समय साथ रहने वाला दोस्त आज देश की जिम्मेदारी संभाल रहा है. उनके मुताबिक, मोदी की इस यात्रा को देखकर उन्हें गर्व होता है.
जो ठान लेते हैं, पूरा करके दिखाते हैं
शामलदास ने पीएम मोदी के काम करने के तरीके की भी तारीफ की. चिट्ठी में लिखा है कि वह जो ठान लेते हैं, उसे पूरा करके दिखाते हैं. 25 साल के सार्वजनिक जीवन का जिक्र करते हुए उन्होंने नरेंद्र मोदी को 'नूतन भारत का शिल्पकार' बताया. यहां दोस्त की बात में एक अलग तरह का अपनापन भी दिखता है. वह प्रधानमंत्री के पद या पहचान से ज्यादा उस इंसान को याद करते हैं, जिसे उन्होंने वडनगर में बचपन से देखा है.
वडनगर को लेकर भी लिखी बात
शामलदास ने वडनगर के विकास का जिक्र करते हुए नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया. उन्होंने शहर की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने और उसे दुनिया के सामने लाने के लिए किए गए कामों की बात लिखी. वडनगर गुजरात के मेहसाणा जिले में है. यही वह शहर है, जहां नरेंद्र मोदी का बचपन बीता. उनकी आधिकारिक जीवनी में भी वडनगर को उनके शुरुआती जीवन से जुड़ा अहम स्थान बताया गया है.
'भारत का दुनिया में डंका बज रहा है'
चिट्ठी में शामळदास ने भारत की वैश्विक पहचान का भी जिक्र किया. उनका कहना है कि अमेरिका समेत पूरी दुनिया में भारत और नरेंद्र मोदी की चर्चा हो रही है. यह बात उन्होंने अपने दोस्त की कामयाबी पर गर्व जताते हुए लिखी है.
आखिर में उन्होंने प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. लंबे जीवन और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की. चिट्ठी की खासियत यही है कि इसमें बड़े-बड़े दावों से ज्यादा एक पुराने दोस्त का अपनापन दिखाई देता है कि वडनगर के उस बचपन से लेकर आज तक का, जब वही दोस्त देश के प्रधानमंत्री के तौर पर पहचाना जाता है.
ब्रिजेश दोशी