मैट्रिमोनियल साइट पर 'जिज्ञासा कपूर' बनकर 2 करोड़ की ठगी, गुजरात से नेपाल तक फैले तार

मैट्रिमोनियल साइट पर दोस्ती, फॉरेक्स ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का झांसा और फिर करोड़ों रुपये की ठगी. गुजरात पुलिस ने ऐसे अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का खुलासा किया है, जिसके तार नेपाल तक जुड़े मिले हैं. जांच में फर्जी प्रोफाइल, फर्जी कंपनी और कई बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ है.

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मैट्रिमोनियल साइट पर लड़की बनकर 2 करोड़ की ठगी (Photo: itg) मैट्रिमोनियल साइट पर लड़की बनकर 2 करोड़ की ठगी (Photo: itg)

ब्रिजेश दोशी

  • सूरत,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:06 AM IST

पिछले कुछ सालों से साइबर धोखाधड़ी के एक के बाद एक नए मामले सामने आते जा रहे हैं. वैसे में अब गुजरात साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की टीम ने एक ऐसे घोटाले का पर्दाफाश किया है जिसमें मैट्रिमोनियल साइट  पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर करोडों की धोखाधडी की गई थी और इसमें नेपाल में रह रहे शख्स ने पूरा जाल बिछाया था.

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मैट्रिमोनियल साइट पर 'जिज्ञासा कपूर' नाम की नकली प्रोफाइल बनाकर फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर सूरत के एक युवक के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. नकली प्रोफ़ाइल के ज़रिए युवक से दोस्ती करके उसे फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए मनाकर धोखाधड़ी की गई थी. जांच करने पर इस धोखाधड़ी के तार गुजरात से नेपाल तक जुड़े पाए गए. पुलिस ने 2.30 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी के मामले में एक डॉक्टर समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जिन बैंक खातों में घोटाले की रकम ट्रांसफर की गई थी, उनका इस्तेमाल 31 साइबर धोखाधड़ी के मामलों में होने का पता चला है. इसमें कुल 15 करोड़ रुपये की हेराफेरी होने की बात भी सामने आई है.

स्टेट साइबर सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के एसपी डॉ. राजदीप सिंह झाला ने बताया कि आरोपियों ने मैट्रिमोनियल साइट पर 'जिज्ञासा कपूर' नाम की नकली प्रोफ़ाइल बनाई थी. इसके बाद 'Dilsafar' ऐप के ज़रिए पीड़ित से संपर्क किया और फॉरेक्स ट्रेडिंग में शुरुआत में 50 हज़ार रुपये का इंवेस्टमेंट करवाया. 

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मुनाफा दिखाकर पीड़ित का भरोसा जीतने के बाद उन्हें RoboForex प्लेटफॉर्म पर और निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया. आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 2.30 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवाए. बाद में, अकाउंट लॉक होने की बात कहकर और पैसे जमा करने के लिए दबाव डाला गया. जब पीड़ित को धोखाधड़ी का शक हुआ, तो शिकायत दर्ज कराई गई. आरोपियों ने अपने आर्थिक लाभ के लिए दूसरों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए थे और 'R.P. Chemicals' नाम की एक फर्जी फर्म बनाकर उसके खातों के जरिए धोखाधड़ी की रकम स्वीकार की और उसे अन्य खातों में ट्रांसफर किया. 

जांच के दौरान इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जानकारी NCRP पोर्टल पर जांचने पर देश भर में दर्ज 31 साइबर धोखाधड़ी के मामलों से इनके तार जुड़े होने का पता चला. इन सभी मामलों में लगभग 3.15 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी सामने आई है. 

डॉ. झाला के अनुसार, पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. उनके पास से 7 मोबाइल फोन, एक आधार कार्ड और एक पासबुक सहित अन्य सामान जब्त किया गया है. पूरी कार्रवाई 'स्टेट साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की टीम ने की. इस अपराध में पकड़े गए आरोपियों ने अपने आर्थिक लाभ के लिए 'R.P. Chemicals' नाम से खाता खुलवाया और उसकी किट कमीशन पर सह-आरोपी याज्ञिक अशोकभाई रमानी को दी. 

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इसके बाद, सह-आरोपी जयदीपकुमार आर देसना (जो उपलेटा में अपना क्लिनिक चलाते हैं) के माध्यम से आरोपी लक्ष्मण वाघेला से संपर्क किया गया.  फिर पंकज पासवान के जरिए दिल्ली में राहुल से और सरफराज के जरिए नेपाल में संपर्क करके धोखाधड़ी के पैसे को ठिकाने लगाने के लिए उस खाते की किट उपलब्ध कराई गई. यह पहली बार है जहां पर नेपाल में रह रहे किसी शख्स ने सायबर धोखाधडी के मामले को अंजाम दिया है. पुलिस अभी नेपाल से उपयोग किए सभी आईपी एड्रेस की जांच कर रही है.

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