गुजरात के अमरेली में खेतों के आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है. धारी इलाके में एक बार फिर तेंदुए ने इंसान पर हमला किया है. इस बार निशाना खेत मजदूर परिवार की एक बच्ची बनी. घटना देवला गांव की सीमा में हुई. तेंदुए के हमले में बच्ची के गले और छाती पर चोटें आई हैं. उसे पहले धारी के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद अमरेली रेफर कर दिया गया.
धारी इलाके में एक हफ्ते के भीतर इंसानों पर तेंदुए के हमले की यह दूसरी घटना है. इससे पहले नागधरा गांव की सीमा में एक सात साल के बच्चे पर तेंदुए ने हमला किया था. अब देवला गांव में हुई घटना ने खेतों में काम करने वाले परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है. खासकर उन मजदूरों की, जो अपने बच्चों के साथ खेतों और वाड़ियों में जाते हैं.
घटना धारी तहसील के देवला गांव की सीमा में एक वाड़ी के पास हुई. मजदूर परिवार की बच्ची खेत पर मौजूद थी. इसी दौरान अचानक तेंदुआ पहुंचा और उस पर हमला कर दिया. हमले में बच्ची के गले और छाती पर पंजों के निशान आए.
बच्ची के पिता निजामभाई राठौड़ के मुताबिक, कुछ बच्चे मोबाइल देने के लिए वाड़ी की तरफ जा रहे थे. मोबाइल चालू था और इसी दौरान तेंदुए ने बेटी पर हमला कर दिया. जैसे-तैसे तेंदुआ ने बच्ची को छोड़ा और भाग गया. घटना के बाद वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई. परिवार और आसपास के लोगों ने बच्ची को संभाला और इलाज के लिए धारी के सरकारी अस्पताल पहुंचाया.
यह भी पढ़ें: जूनागढ़ और मुरादाबाद... दोनों जगहों से कुत्तों को दबोच ले गया तेंदुआ, वीडियो में जो दिखा वो दहला देने वाला है
हमले के बाद बच्ची को धारी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां डॉक्टरों ने उसकी चोटों की जांच की और प्राथमिक इलाज दिया. अस्पताल की डॉक्टर संजना ने बताया कि 5 नवंबर को बच्ची को तेंदुए के हमले में घायल होने के बाद अस्पताल लाया गया था. बच्ची के शरीर पर तेंदुए के पंजों से बने घाव थे. चोटें गंभीर नहीं थीं और इलाज के समय उसकी हालत स्थिर है. प्राथमिक उपचार के बाद उसे आगे के इलाज के लिए अमरेली भेज दिया गया.
धारी इलाके में तेंदुए के हमले की यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले नागधरा गांव की सीमा में तेंदुए ने सात साल के एक बच्चे पर हमला किया था. अब देवला गांव में बच्ची पर हमले की घटना सामने आई है. एक ही हफ्ते में दो बच्चों पर हमले की खबर ने ग्रामीणों को दहशत में डाल दिया है. खेतों में काम करने वाले परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल बच्चों की सुरक्षा का है.
कपास की फसल की चुनाई के दौरान मजदूरों को खेतों में काफी समय बिताना पड़ता है. कई बार बच्चे भी परिवार के साथ खेत या वाड़ी तक चले जाते हैं. ऐसे में तेंदुए की मौजूदगी उनके लिए खतरा बन सकती है. लगातार हमलों के बाद ग्रामीण चाहते हैं कि वन विभाग प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाए. लोगों की मांग है कि तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाए और उसकी आवाजाही पर नजर रखी जाए.
फारूक कादरी