गुजरात में मानसून खत्म होने के बाद सरकार ने चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है. यहां किसानों के साथ पशुपालकों को भी राहत देने की तैयारी है. सरकार ने इसके लिए ऐसा प्लान बनाया है, जिसमें आर्थिक मदद से लेकर पशुओं के चारे तक का इंतजाम शामिल है. राहत के ये नियम नवंबर से लागू होंगे.
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने द्वारका, कच्छ, पोरबंदर और जामनगर को सूखाग्रस्त घोषित किया है. सरकार के मुताबिक, इस मानसून सीजन में गुजरात में औसतन 89 फीसदी बारिश दर्ज हुई. इसके बावजूद इन चार जिलों में सूखे से निपटने के लिए विशेष कदम उठाने का फैसला लिया गया है.
ये नियम 1 नवंबर 2026 से लागू होंगे और अगले छह महीने तक प्रभावी रहेंगे. सरकार ने सूखा निर्धारण की 2016 की गाइडलाइन के आधार पर यह फैसला लिया है.
किसानों को कितनी मदद मिलेगी
सरकार प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की सहायता देगी. यह मदद अधिकतम दो हेक्टेयर जमीन तक के लिए होगी. इससे सूखे की मार झेल रहे किसानों को राहत मिल सकेगी.
वहीं, सूखे में पशुओं के लिए चारे की कमी भी परेशानी बढ़ा सकती है. इसे देखते हुए सरकार ने घास की उपलब्धता पर जोर दिया है. मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य में अब तक 1.21 करोड़ किलो घास बांटी जा चुकी है. फिलहाल सरकार के पास तीन करोड़ किलो घास का स्टॉक है.
150 दिन तक मिलेगा रोजगार
राहत के तहत सूखाग्रस्त जिलों में VB-G RAM G के अंतर्गत 150 दिन तक रोजगार देने की भी बात कही गई है. इससे ग्रामीण परिवारों को काम मिलने में मदद मिलेगी. सरकार का कहना है कि आने वाले दिनों में प्रभावित किसानों और पशुपालकों की जरूरत के हिसाब से सहायता दी जाएगी.
अतुल तिवारी