अस्पताल में मरीज को ले जाने के लिए स्ट्रेचर है. लेकिन उसे खींचने वाला कोई कर्मचारी नजर नहीं आ रहा. फिर आगे क्या होता है? करीब 70 साल की एक बुजुर्ग महिला खुद स्ट्रेचर का हैंडल पकड़ती हैं और उसे खींचने लगती हैं. स्ट्रेचर पर उनके अपने परिजन हैं, जिन्हें इलाज के लिए ले जाना है. गुजरात के राजकोट सिविल अस्पताल का यह वीडियो वायरल है. लोग इस पर सवाल भी कर रहे हैं. जिस उम्र में किसी बुजुर्ग को खुद सहारे की जरूरत पड़ सकती है, उस उम्र में उन्हें अपने बीमार परिजन को स्ट्रेचर पर ले जाने की मशक्कत क्यों करनी पड़ी?
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच की बात कही है. संबंधित एजेंसी को नोटिस भी जारी किया गया है. लेकिन कहानी में सबसे अहम सवाल अब भी वही है- आखिर उस वक्त हुआ क्या था? राजकोट सिविल अस्पताल को सौराष्ट्र के बड़े अस्पतालों में गिना जाता है. यहां लोग इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं.
खासकर उन परिवारों के लिए, जो महंगे प्राइवेट अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते, सरकारी अस्पताल किसी बड़े सहारे से कम नहीं होते. लेकिन वायरल वीडियो में जो दिखता है, वह सवाल खड़े करता है. एक बुजुर्ग महिला अस्पताल परिसर में स्ट्रेचर खींचती दिखाई देती हैं. स्ट्रेचर पर परिजन है और उसे इलाज के लिए ले जाना है.
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अब जरा सोचिए. मरीज की तबीयत खराब है. परिवार पहले से परेशान है. ऐसे में अस्पताल के भीतर मरीज को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की जिम्मेदारी भी किसी बुजुर्ग को खुद उठानी पड़े, तो परेशानी और बढ़ जाती है. वीडियो में 70 साल की बुजुर्ग महिला को स्ट्रेचर खींचते देखा जा सकता है. हालांकि, उस समय वहां क्या परिस्थितियां थीं, कर्मचारी मौजूद थे या नहीं और महिला को खुद स्ट्रेचर क्यों खींचना पड़ा, इसकी डिटेल अभी सामने नहीं आई है.
वीडियो वायरल हुआ, तो अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?
वीडियो सामने आने के बाद राजकोट सिविल अस्पताल के हिसाबी अधिकारी एम.एस. रॉय ने मामले में अपनी बात रखी. उन्होंने घटना को दुखद बताया और कहा कि इसकी जांच की जा रही है. अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, संबंधित एजेंसी को नोटिस जारी किया गया है.
भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP तैयार करने की बात कही गई है. प्रशासन का कहना है कि मरीजों को स्ट्रेचर पर ले जाने के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था का सख्ती से पालन कराया जाएगा. मकसद यह है कि मरीजों और उनके परिजनों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. यानी अस्पताल ने मामले को गंभीर माना है.
इस पूरे मामले में कुछ सवाल सीधे अस्पताल की व्यवस्था से जुड़े हैं. क्या उस वक्त स्ट्रेचर ले जाने के लिए कर्मचारी मौजूद नहीं थे? क्या संबंधित एजेंसी ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई? या फिर कोई ऐसी परिस्थिति थी, जिसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है? इन सवालों का जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है. अस्पताल प्रशासन ने जांच की बात कही है. एक बात साफ है. अस्पताल में स्ट्रेचर होना और जरूरत के समय मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाने के लिए मदद मिलना, दो अलग-अलग बातें हैं. सुविधा का मतलब तभी है, जब वह मरीज के काम भी आए.
रौनक मजीठिया